Twisha Suicide Case में बड़ा मोड़! CBI को मिली समर्थ सिंह की रिमांड, कोर्ट में गूंजी चैट्स और गंभीर आरोपों की गूंज

भोपाल। ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में अब जांच ने बड़ा मोड़ ले लिया है। इस हाई प्रोफाइल केस में आरोपी पति समर्थ सिंह की रिमांड सीबीआई को मिल गई है। बुधवार को एसआईटी की टीम समर्थ सिंह को लेकर भोपाल कोर्ट पहुंची, जहां उसे न्यायालय में पेश करने के बाद आधिकारिक तौर पर सीबीआई के हवाले कर दिया गया। अब इस पूरे मामले में सीबीआई सीधे पूछताछ कर सच्चाई तक पहुंचने की कोशिश करेगी।

जानकारी के मुताबिक, पुलिस टीम समर्थ सिंह को कटारा हिल्स थाने से मेडिकल के लिए एम्स अस्पताल लेकर पहुंची थी। मेडिकल प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसे भोपाल स्थित न्याय सेवा सदन में जेएमएफसी आकांक्षा कुमार उचाड़िया की अदालत में पेश किया गया। कोर्ट में पेशी के दौरान एसआईटी ने आरोपी को सीबीआई को हैंडओवर कर दिया।

इधर, ट्विशा शर्मा की सास और पूर्व जज गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत याचिका पर भी सुनवाई जारी है। जबलपुर में हुई सुनवाई के दौरान पीड़िता पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने कई गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि निचली अदालत ने मामले की गंभीरता को नजरअंदाज किया और केस डायरी को ठीक से नहीं देखा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि घटना के बाद पीड़िता के परिवार को समय पर जानकारी तक नहीं दी गई।

पीड़िता पक्ष के वकील ने कोर्ट में व्हाट्सएप चैट्स का भी जिक्र किया और कहा कि इन चैट्स को ट्रायल कोर्ट ने पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया। उन्होंने कहा कि शादी के सात साल के भीतर मौत होने के बावजूद दहेज प्रताड़ना का मामला दर्ज नहीं किया गया। चैट्स में ट्विशा के दर्द, मानसिक प्रताड़ना और परिवार के व्यवहार का जिक्र था। एक चैट में ट्विशा ने लिखा था कि “मेरे लिए इनके दिल में कोई दया नहीं है।” वहीं घटना से कुछ दिन पहले उसने अपने घरवालों से “मुझे लेने आ जाओ” जैसी बात भी कही थी।

महाधिवक्ता ने कोर्ट में कहा कि 17 फरवरी को पहली बार यह जानकारी सामने आई कि ट्विशा प्रेग्नेंट थी। आरोप है कि उससे उसके होने वाले बच्चे को लेकर भी सवाल पूछे गए। सुनवाई के दौरान यह भी कहा गया कि ट्विशा के शरीर पर कई चोटों के निशान मिले थे, जिनका जिक्र पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी किया गया है। सवाल यह उठाया गया कि इतने गंभीर तथ्यों के बावजूद ट्रायल कोर्ट ने अग्रिम जमानत कैसे दे दी।

वहीं, गिरिबाला सिंह की ओर से पेश वकील नित्य रामकृष्ण ने कहा कि घटना के महज 20 मिनट बाद ट्विशा को एम्स अस्पताल पहुंचा दिया गया था और उस समय गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह दोनों मौजूद थे। उन्होंने जांच में सहयोग न करने के आरोपों को गलत बताया और कहा कि पुलिस ने 13 मई की सुबह ही घटनास्थल से जरूरी सामान जब्त कर लिया था।

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी अदालत में कड़ा पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि जिस आधार पर गिरिबाला सिंह को अग्रिम जमानत दी गई, उस हिसाब से तो अधिकांश मामलों में आसानी से जमानत मिल जाएगी। उन्होंने सवाल उठाया कि एफआईआर से पहले जमानत देने का आधार क्या था। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया कि कानून की जानकारी होने का फायदा उठाकर प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की गई।

अब पूरे मामले पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं। सीबीआई की जांच और कोर्ट की अगली सुनवाई इस हाई प्रोफाइल केस में कई नए खुलासे कर सकती है।

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