मध्यप्रदेश के मुरैना जिले की पोरसा तहसील के नगरा घाट पर रविवार को उस वक्त हड़कंप मच गया, जब चंबल नदी की तेज धार के बीच स्टीमर का इंजन अचानक बंद हो गया। स्टीमर में 150 से ज्यादा यात्री सवार थे, जिनमें बड़ी संख्या में कांवड़िए शामिल थे। इंजन बंद होने के बाद स्टीमर तेज बहाव के साथ नदी की धार में बहने लगा, जिससे यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई।
ढाई घंटे तक नदी की धार में बहता रहा स्टीमर
जानकारी के मुताबिक स्टीमर में डीजल खत्म होने की वजह से इंजन बंद होने की बात सामने आई है। हालांकि कुछ लोगों ने इंजन के पंप में खराबी को इसकी वजह बताया है। इंजन बंद होने के बाद स्टीमर करीब दो से ढाई घंटे तक नदी की तेज धार में बहता रहा।
इस दौरान स्टीमर धीरे-धीरे मुरैना के नगरा घाट से दूर होता हुआ भिंड जिले की तरफ पहुंच गया। राहत की बात यह रही कि स्टीमर आखिरकार भिंड जिले के कक्षपुरा घाट के पास जाकर रुक गया और सभी यात्री सुरक्षित बताए गए।
कांवड़ लेकर बटेश्वर मंदिर जा रहे थे यात्री
बताया जा रहा है कि स्टीमर में सवार यात्री चंबल नदी पार कर उत्तर प्रदेश के केंजरा घाट की ओर जा रहे थे। इनमें अधिकांश कांवड़िए थे, जो नगरा घाट से कांवड़ लेकर उत्तर प्रदेश के बटेश्वर मंदिर में गंगाजल चढ़ाने के लिए निकले थे।
स्टीमर जैसे ही नदी की बीच धार में पहुंचा, उसका इंजन बंद हो गया। इसके बाद स्टीमर घाट से दूर होकर तेज बहाव के साथ बहने लगा। यात्रियों के बीच चीख-पुकार और अफरा-तफरी की स्थिति बन गई।
मुरैना से भिंड तक प्रशासन में मचा हड़कंप
घाट पर मौजूद लोगों ने जब स्टीमर को नदी की धार में भिंड की ओर बहते देखा तो इसकी सूचना प्रशासन को दी गई। इसके बाद पुलिस, प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें सक्रिय हो गईं।
इसी बीच राहत की खबर आई कि स्टीमर भिंड जिले के कक्षपुरा घाट तक पहुंच गया है और उसमें सवार सभी यात्री सुरक्षित हैं।
बंद करने के निर्देश के बावजूद चल रहा था स्टीमर
इस घटना ने प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। बारिश के कारण चंबल नदी इस समय उफान पर है और नदी का बहाव तेज बताया जा रहा है। इसी वजह से चंबल नदी के घाटों पर संचालित होने वाले स्टीमर को बंद करने के निर्देश दिए गए थे।
बताया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश प्रशासन के निर्देशों के बाद एसडीएम ने भी स्टीमर संचालन बंद करने को कहा था। इसके बावजूद नगरा घाट से स्टीमर का संचालन जारी रहा।
अब बीच नदी में स्टीमर का इंजन बंद होने और 150 से ज्यादा यात्रियों के तेज बहाव में बहने की घटना के बाद सवाल उठ रहा है कि आखिर बंद करने के निर्देश के बावजूद स्टीमर का संचालन क्यों जारी रखा गया और यात्रियों की सुरक्षा को लेकर क्या व्यवस्था की गई थी।

