शौचालय से बना वृद्धाश्रम, फिर सामने आया बुजुर्गों पर अत्याचार का वीडियो! सरकारी जमीन, अवैध संचालन और मारपीट के आरोपों ने खोली कई परतें

इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है। जिस जगह का इस्तेमाल कभी सार्वजनिक शौचालय के लिए किया जाता था, वहां कथित तौर पर एक वृद्धाश्रम संचालित किया जा रहा था। लेकिन मामला तब तूल पकड़ गया, जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें एक नाबालिग बुजुर्गों के साथ मारपीट करता दिखाई दिया।

बताया जा रहा है कि यह वृद्धाश्रम मारीमाता चौराहे के पास पानी की टंकी के नीचे ‘महाराणा प्रताप वेलफेयर सोसाइटी’ के नाम से संचालित किया जा रहा था। वीडियो सामने आने के बाद प्रशासन और पुलिस तत्काल हरकत में आ गए। जानकारी के मुताबिक, वीडियो वायरल होने के बाद आश्रम की संचालिका खुद नाबालिग को लेकर थाने पहुंची, लेकिन पूछताछ के दौरान वह कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब नहीं दे सकी।

जांच के दौरान पुलिस ने वृद्धाश्रम के संचालन से जुड़े दस्तावेज मांगे, लेकिन कथित तौर पर कोई वैध अनुमति या जरूरी कागजात प्रस्तुत नहीं किए जा सके। इसके बाद यह सवाल उठने लगा कि आखिर बिना अनुमति यह वृद्धाश्रम कब से और किसके संरक्षण में चल रहा था।

प्रशासनिक जांच में यह भी सामने आया कि जिस स्थान पर आश्रम संचालित किया जा रहा था, वह सरकारी जमीन है। आरोप है कि यहां पहले सार्वजनिक शौचालय था, जिसे बाद में वृद्धाश्रम का स्वरूप दे दिया गया। वहीं, आश्रम परिसर में लगे बोर्ड पर कुछ प्रमुख नाम भी दर्ज पाए गए, जिनकी भूमिका को लेकर अब जांच जारी है।

वीडियो सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आश्रम में रह रहे 31 बुजुर्गों को सुरक्षित रूप से शासकीय निराश्रित वृद्धाश्रम में शिफ्ट कर दिया। साथ ही विवादित परिसर को सील कर दिया गया है।

मल्हारगंज एसडीएम की कार्रवाई के बाद संचालिका के खिलाफ बिना अनुमति वृद्धाश्रम संचालित करने सहित विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है। मामले की जांच पुलिस द्वारा की जा रही है। अधिकारी अब यह पता लगाने में जुटे हैं कि यह कथित अवैध संचालन कब से चल रहा था और क्या बुजुर्गों के साथ इस तरह की घटनाएं पहले भी होती रही हैं।

यह मामला केवल एक वायरल वीडियो का नहीं, बल्कि व्यवस्था और निगरानी पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। आखिर सरकारी जमीन पर कथित तौर पर बिना अनुमति वृद्धाश्रम कैसे संचालित होता रहा और जिन बुजुर्गों को सहारे और सम्मान की जरूरत थी, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी थी? अब सभी की नजर प्रशासनिक जांच और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी है।

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