कुपोषण मुक्त शिवपुरी के दावे सवालों के घेरे में! 1476 बच्चे अति कुपोषित, एक महीने में सामने आए 92 नए मामले

शिवपुरी। मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में कुपोषण को लेकर सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है। जिले को कुपोषण मुक्त बनाने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के ताजा आंकड़े बेहद चिंताजनक तस्वीर पेश कर रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक, जिले में 92 नए गंभीर कुपोषित बच्चों की पहचान की गई है, जबकि कुल 1476 बच्चे अति कुपोषित श्रेणी में दर्ज हैं।

शिवपुरी जिला अस्पताल में वर्तमान में 20 कुपोषित बच्चों का इलाज चल रहा है। इनमें से 10 बच्चों की स्थिति बेहद गंभीर बताई जा रही है और वे अति कुपोषित श्रेणी में शामिल हैं। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि कुपोषण अब केवल ग्रामीण क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शहरों में भी बड़ी संख्या में बच्चे इसकी चपेट में हैं।

एक ओर महिला एवं बाल विकास विभाग आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से पोषण आहार वितरण के दावे कर रहा है, तो दूसरी ओर लगातार सामने आ रहे मामले इन दावों पर सवाल खड़े कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद जरूरतमंद बच्चों तक पोषण आहार प्रभावी तरीके से नहीं पहुंच पा रहा है।

डॉक्टरों का मानना है कि समय पर उपचार और उचित पोषण मिलने पर बच्चों की स्थिति में सुधार संभव है। लेकिन हर महीने नए मामलों का सामने आना इस बात का संकेत है कि व्यवस्था में कहीं न कहीं गंभीर खामियां मौजूद हैं।

वहीं, महिला एवं बाल विकास अधिकारी धीरेंद्र जादौन का कहना है कि विभाग की ओर से हर महीने 11 से 20 तारीख के बीच पांच वर्ष तक के बच्चों का वजन और लंबाई का परीक्षण किया जाता है। इसके आधार पर बच्चों के स्वास्थ्य का विश्लेषण किया जाता है और कुपोषण रोकने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

हालांकि, आंकड़े एक अलग कहानी बयां कर रहे हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर शिवपुरी कब कुपोषण के इस दंश से मुक्त हो पाएगा और सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तव में जरूरतमंद बच्चों तक कब पहुंचेगा?

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