राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर बोले बाबा बागेश्वर! ‘आस्था से खिलवाड़ करने वालों को भगवान देंगे महादंड’

छतरपुर। अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे को लेकर सामने आए कथित गड़बड़ी के मामले पर बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने इस पूरे मामले पर गहरी नाराजगी जताते हुए कहा कि अगर किसी ने भगवान के नाम पर चढ़ाए गए दान में गड़बड़ी की है, तो वह केवल धन की नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था की चोरी है।

इंडोनेशिया में आयोजित हनुमान कथा के दौरान धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि भगवान के मंदिर से जुड़ी किसी भी प्रकार की अनियमितता बेहद गंभीर विषय है। उन्होंने रावण का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह माता सीता का हरण करने वाले रावण का अंत हुआ था, उसी तरह आस्था के साथ खिलवाड़ करने वालों को भी उनके कर्मों का फल अवश्य मिलेगा। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को कानून अपना दंड देगा ही, लेकिन ईश्वर के न्याय से भी कोई नहीं बच सकता।

धीरेंद्र शास्त्री ने यह भी कहा कि इस मामले में दर्ज एफआईआर के बाद जांच पूरी पारदर्शिता के साथ आगे बढ़नी चाहिए। उनका मानना है कि निष्पक्ष जांच से यदि कोई और जिम्मेदार व्यक्ति सामने आता है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।

दरअसल, इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब समाजवादी पार्टी के पूर्व मंत्री पवन पांडेय ने राम मंदिर में चढ़ावे की राशि में कथित गड़बड़ी का आरोप लगाया। इसके बाद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी मामले में न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की। वहीं भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर मामले की सीबीआई और ईडी से जांच कराने की मांग की थी।

इसके बाद मंदिर ट्रस्ट की बैठक हुई, प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी ट्रस्ट से रिपोर्ट मांगी और मामले को लेकर कई स्तर पर चर्चा हुई। ट्रस्ट की ओर से पहले आरोपों को खारिज किया गया, लेकिन बाद में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर श्रीराम जन्मभूमि थाने में एफआईआर दर्ज की गई। इस मामले में आठ लोगों को नामजद किया गया है और जांच जारी है।

इसी बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा के पद छोड़ने की खबर भी सामने आई है। हालांकि इस पूरे मामले में अंतिम स्थिति और किसी भी व्यक्ति की जिम्मेदारी जांच पूरी होने और आधिकारिक निष्कर्ष आने के बाद ही स्पष्ट होगी।

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