समझौता बैठक में बवाल! बीजेपी जिला अध्यक्ष के सामने पार्षद की पिटाई, महादेव मंदिर विवाद ने पकड़ा तूल

श्योपुर। मध्य प्रदेश के श्योपुर में महादेव मंदिर की जमीन को लेकर बुलाई गई समझौता बैठक उस वक्त विवादों में घिर गई, जब बैठक के दौरान जमकर हंगामा हो गया। आरोप है कि बीजेपी जिला अध्यक्ष और अन्य नेताओं की मौजूदगी में नगर पालिका पार्षद के साथ मारपीट की गई। इस घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

जानकारी के मुताबिक, श्योपुर शहर के बीजेपी कार्यालय में वार्ड-14 स्थित ऐतिहासिक महादेव मंदिर की जमीन से जुड़े विवाद को सुलझाने के लिए बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में बीजेपी जिला अध्यक्ष शशांक भूषण, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य महावीर सिंह सिसोदिया, सांसद प्रतिनिधि, नगर पालिका अध्यक्ष के पति सुजीत गर्ग सहित बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद थे।

बैठक के दौरान मंदिर की जमीन से जुड़े दस्तावेजों पर चर्चा हो रही थी। इसी बीच दस्तावेजों को लेकर विवाद बढ़ गया और माहौल अचानक गरमा गया। फरियादी पार्षद जुगल किशोर मेहरा का आरोप है कि उन्होंने बैठक में पेश किए गए कुछ दस्तावेजों पर सवाल उठाए, जिसके बाद उनके साथ कथित तौर पर मारपीट की गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें जातिसूचक शब्द कहे गए और जान से मारने की धमकी दी गई।

घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें बैठक के दौरान अफरा-तफरी का माहौल दिखाई दे रहा है। वीडियो में कुछ लोग बीच-बचाव करते नजर आ रहे हैं, जबकि मौजूद पदाधिकारी स्थिति को संभालने की कोशिश करते दिखाई दे रहे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि वार्ड-14 स्थित महादेव मंदिर कई वर्षों पुराना है और उसकी जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। क्षेत्रवासियों का आरोप है कि कुछ लोग मंदिर की जमीन पर कब्जा करना चाहते हैं, जबकि स्थानीय लोग वहां धार्मिक और सार्वजनिक निर्माण कार्य कराना चाहते हैं। उनका यह भी कहना है कि इस मामले की शिकायत पहले भी पुलिस, नगर पालिका और जिला प्रशासन से की जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है।

घटना के बाद पार्षद जुगल किशोर मेहरा ने कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर एससी-एसटी एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि वायरल वीडियो और अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

अब इस पूरे मामले ने राजनीतिक रंग भी पकड़ लिया है। ऐसे में सबकी नजरें पुलिस जांच पर टिकी हैं कि आखिर इस समझौता बैठक में हंगामे की असली वजह क्या थी और दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है।

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