जबलपुर। जबलपुर में एक आदिवासी युवक की संदिग्ध मौत का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। डुमना चौकी क्षेत्र के महंगवा गांव निवासी नितिन बैगा की मौत को लेकर भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन, यानी एनएसओ ने निष्पक्ष जांच की मांग की है। संगठन का आरोप है कि यदि पुलिस समय रहते कार्रवाई करती, तो शायद नितिन की जान बचाई जा सकती थी।
जानकारी के अनुसार, नितिन बैगा 8 जून की शाम अपने घर से निकला था, जिसके बाद वह वापस नहीं लौटा। परिजनों ने उसकी गुमशुदगी की सूचना पुलिस को दी थी, लेकिन कई दिनों तक उसका कोई पता नहीं चल सका। बाद में उसका शव महंगवा स्थित खाटू श्याम मंदिर के पास जंगल में बरामद हुआ, जिसके बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई।
इस मामले को लेकर भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन के जिला उपाध्यक्ष राहुल पाण्डेय ने थाना प्रभारी को ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले की निष्पक्ष जांच नहीं की जा रही है और सच्चाई सामने लाने के लिए पुलिस को जल्द कार्रवाई करनी चाहिए। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द उचित कदम नहीं उठाए गए, तो मृतक के परिजनों के साथ मिलकर बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
वहीं, खमरिया थाना प्रभारी राजकुमार खटीक ने बताया कि नितिन बैगा के लापता होने की शिकायत दर्ज की गई थी और 30 जून को उसका शव बरामद हुआ। पुलिस के मुताबिक, मामले की जांच जारी है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में फांसी लगने की पुष्टि हुई है। साथ ही, मृतक के शरीर पर किसी भी प्रकार के बाहरी चोट के निशान नहीं पाए गए हैं।
हालांकि, परिजन और छात्र संगठन इस मामले में कई सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि आखिर नितिन की मौत किन परिस्थितियों में हुई और गुमशुदगी के बाद पुलिस की कार्रवाई कितनी प्रभावी रही? इन सवालों के जवाब अब पुलिस जांच के बाद ही सामने आ पाएंगे।
फिलहाल, इस मामले ने जबलपुर में नया विवाद खड़ा कर दिया है और अब सभी की नजरें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

