भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। अभय मिश्रा मंत्रालय के सामने धरने पर बैठे थे, तभी पुलिस उन्हें वहां से उठाकर थाने ले गई। इस दौरान रेलिंग पर लगाए गए बैनर और पोस्टर भी पुलिस ने हटा दिए।
दरअसल, अभय मिश्रा रीवा के संजय गांधी अस्पताल में कल्पना मिश्रा की मौत के मामले में दोषियों पर कार्रवाई और न्याय की मांग को लेकर धरना दे रहे थे। 25 अगस्त 2026 को कल्पना मिश्रा को डिलीवरी के लिए रीवा के संजय गांधी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अगले दिन 26 अगस्त की रात ऑपरेशन के बाद कल्पना मिश्रा और उनके नवजात बच्चे की मौत हो गई थी।
परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए थे। वहीं, कल्पना मिश्रा की मौत से पहले का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। घटना के बाद रीवा से लेकर राजधानी भोपाल तक विरोध प्रदर्शन देखने को मिले। सामाजिक संगठनों के साथ-साथ विपक्षी दलों ने भी मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग उठाई।
दोषियों पर कार्रवाई और न्याय की मांग को लेकर रीवा जिले की सेमरिया विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा भोपाल में मंत्रालय के सामने धरने पर बैठे थे। उनका आरोप है कि मध्य प्रदेश में अराजकता और लूटपाट का माहौल बना हुआ है। उन्होंने सरकार पर पैसे कमाने और बांटने का खेल चलने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार इन मुद्दों पर ध्यान नहीं दे रही है।
अभय मिश्रा ने कहा कि रीवा के सरकारी अस्पताल में कल्पना मिश्रा की जिस तरह दर्दनाक मौत हुई, वहां इस तरह की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि वह सोई हुई सरकार को जगाने के लिए सांकेतिक धरना दे रहे हैं।
कांग्रेस विधायक ने स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला के इस्तीफे की मांग भी की। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग को ऐसे मंत्री से मुक्ति मिलनी चाहिए।
फिलहाल विधायक अभय मिश्रा को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के बाद यह मामला एक बार फिर सियासी तौर पर गरमा गया है। अब बड़ा सवाल यही है कि कल्पना मिश्रा और उनके नवजात बच्चे की मौत के मामले में जांच कहां तक पहुंचती है और जिम्मेदार लोगों पर कब तक कार्रवाई होती है।

