मध्य प्रदेश के कटनी जिले के आदिवासी अंचल में सावन का महीना भी किसानों के लिए राहत नहीं लेकर आया। बारिश नहीं होने से खेती-किसानी पर संकट गहरा गया है। ढीमरखेड़ा क्षेत्र के ग्राम कोठी और आसपास के कई गांवों में खेत सूखने लगे हैं और जमीन में दरारें दिखाई देने लगी हैं। किसान अब बोरवेल के सहारे किसी तरह धान की फसल बचाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन लगातार हो रही बिजली कटौती उनकी मुश्किलें और बढ़ा रही है।
किसानों का कहना है कि धान की खेती में काफी मेहनत और खर्च लगता है। उन्होंने कर्ज और अपनी जमा पूंजी लगाकर समय पर बोनी तो कर दी, लेकिन अब बारिश नहीं होने से पूरी फसल खतरे में है। अगर जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई, तो उनकी महीनों की मेहनत पर पानी फिर सकता है और भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
स्थिति को और गंभीर बना रही है बिजली की अनियमित आपूर्ति। किसानों का कहना है कि बोरवेल से सिंचाई करने के दौरान बार-बार बिजली चली जाती है, जिससे फसलों को समय पर पानी नहीं मिल पा रहा और सिंचाई का काम प्रभावित हो रहा है।
किसानों की बढ़ती परेशानी को देखते हुए बड़वारा विधायक धीरेंद्र बहादुर सिंह ने बिजली विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि क्षेत्र के किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त और निर्बाध बिजली उपलब्ध कराई जाए, ताकि बारिश नहीं होने की स्थिति में बोरवेल के माध्यम से फसलों को बचाया जा सके। अब किसानों की निगाहें आसमान पर टिकी हैं और उन्हें जल्द अच्छी बारिश होने की उम्मीद है।

