बुधनी। सोचिए, एक सरकारी स्कूल में करीब 95 बच्चे पढ़ते हों और बारिश आते ही उनकी पढ़ाई पर कीचड़ का पहरा लग जाए। कुछ ऐसा ही मामला सामने आया है नीलकंठ की माध्यमिक शाला से, जहां बारिश के बाद स्कूल का पूरा मैदान और प्रांगण कीचड़ से सराबोर हो गया है। हालात इतने खराब हैं कि बच्चे न ठीक से खेल पा रहे हैं और न ही प्रार्थना के समय व्यवस्थित तरीके से खड़े हो पा रहे हैं।
कार्तिकेय चौहान की नीलकंठ से शुरू हुई कांवड़ यात्रा के दौरान जब यह मामला उनके सामने आया, तो स्कूल की शिक्षिका ने अपनी परेशानी खुलकर बताई। लेकिन अपनी बात रखते-रखते शिक्षिका इतनी भावुक हो गईं कि उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। उन्होंने कार्तिकेय चौहान से स्कूल की बदहाल स्थिति को सुधारने के लिए मदद की गुहार लगाई।
शिक्षिका के मुताबिक स्कूल तक पहुंचने वाले रास्ते से लेकर स्कूल परिसर तक जगह-जगह कीचड़ है। बारिश के बाद बच्चों को रोज इसी मुश्किल से गुजरना पड़ता है। कीचड़ की वजह से बच्चों की सुरक्षा भी चिंता का विषय बनी हुई है और स्कूल का खेल मैदान भी इस्तेमाल के लायक नहीं बचा है।
यानी जिन बच्चों के हाथों में किताबें और खेल का सामान होना चाहिए, उनके सामने बारिश के मौसम में कीचड़ और अव्यवस्था खड़ी है।
शिक्षिका ने स्थानीय सरपंच पर भी स्कूल की इस मूलभूत समस्या की अनदेखी करने का आरोप लगाया। सवाल यह है कि आखिर इतने बच्चों वाले स्कूल की ऐसी स्थिति जिम्मेदार पंचायत और शिक्षा विभाग के अधिकारियों की नजर में अब तक क्यों नहीं आई?
सरकार लगातार सरकारी स्कूलों में बेहतर शिक्षा और सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावे करती है, लेकिन नीलकंठ के इस स्कूल की तस्वीर इन दावों के सामने जमीनी हकीकत का सवाल खड़ा कर रही है।
अब शिक्षिका की आंखों से छलके आंसुओं के बाद उम्मीद यही है कि जिम्मेदार अधिकारी इस मामले को गंभीरता से लेंगे और सिर्फ अस्थायी इंतजाम नहीं, बल्कि स्कूल के रास्ते और पूरे परिसर की समस्या का स्थायी समाधान करेंगे, ताकि 95 बच्चों की पढ़ाई बारिश के साथ कीचड़ में न फंसे।

