‘हमारे ट्रंप फूफा कब क्या करेंगे किसी को नहीं पता’, अमेरिकी वीजा पर कैलाश विजयवर्गीय का तंज, शक्कर पर बोले- 40 के बाद दूरी जरूरी

इंदौर। अमेरिका के वीजा नियमों में सख्ती और भारतीयों को लेकर सामने आई नई पाबंदियों पर मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने अपने चुटीले अंदाज में ऐसा तंज कसा कि उनका बयान चर्चा में आ गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बदलती नीतियों पर सवाल पूछा गया तो विजयवर्गीय ने मुस्कुराते हुए कहा, “हमारे ट्रंप फूफा सुबह क्या करेंगे, शाम को क्या करेंगे, किसी को नहीं पता।”

कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि अगर वह अभी अमेरिका की नीति पर कोई जवाब देते हैं और शाम तक ट्रंप अपना बयान बदल देते हैं, तो उनका दिया हुआ जवाब ही गलत साबित हो जाएगा। इसलिए वह इस मुद्दे पर कोई जवाब नहीं देना चाहते। उनके इस बयान में अमेरिका की बदलती नीतियों पर तंज के साथ-साथ उनका खास राजनीतिक अंदाज भी साफ नजर आया।

अमेरिका के बाद कैलाश विजयवर्गीय ने शक्कर को लेकर भी अपनी बेबाक राय रख दी। उन्होंने कहा कि शक्कर महंगी हो जाए तो उन्हें कोई परेशानी नहीं है, लेकिन बच्चों के लिए यह नियंत्रित कीमत पर उपलब्ध होनी चाहिए। वहीं 40 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को शक्कर से दूरी बनाने की सलाह देते हुए उन्होंने कहा, “40 के ऊपर शक्कर बिल्कुल नहीं खाना चाहिए।”

विजयवर्गीय ने शक्कर के मुकाबले गुड़ को बेहतर विकल्प बताया और अपनी बात के समर्थन में आयुर्वेद का भी हवाला दिया। हालांकि उनकी यह टिप्पणी व्यक्तिगत राय के तौर पर सामने आई है।

बीजेपी की राष्ट्रीय मंत्री बनने के बाद कविता पाटीदार के कैलाश विजयवर्गीय के पैर छूने और भावुक होने का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इस पर विजयवर्गीय ने कविता के साथ अपने पुराने रिश्ते को याद किया।

उन्होंने बताया कि जब वह युवा मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष थे, तब एक कार्यक्रम के सिलसिले में महू गए थे। उस दौरान स्वर्गीय भेरूलाल पाटीदार ने उन्हें अपने घर बुलाया था। विजयवर्गीय ने बताया कि उस समय कविता पाटीदार काफी छोटी थीं और स्कूल में पढ़ती थीं। उन्हें आज भी कविता की वह तस्वीर याद है, जिसमें वह स्कूल का बस्ता लेकर चल रही थीं।

विजयवर्गीय ने कहा कि वही बच्ची आज भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय मंत्री बनी हैं, यह गर्व की बात है।

इसी दौरान कैलाश विजयवर्गीय ने इंदौर के पर्यावरण को लेकर भी बड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि दुनिया के सामने ग्लोबल वार्मिंग और पर्यावरण संरक्षण बड़ी चुनौती है और अब इंदौर को सिर्फ स्वच्छता में ही नहीं, बल्कि हरियाली में भी आगे बढ़ना होगा। उनका साफ संदेश था, “क्लीन तो हमने किया, अब ग्रीन करें।”

उन्होंने बताया कि इंदौर के अलग-अलग हिस्सों में बड़े पैमाने पर पौधारोपण अभियान चलाया जा रहा है। सुपर कॉरिडोर क्षेत्र में भी हजारों पौधे लगाने की योजना है। एक बड़े क्षेत्र में करीब 20 हजार पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है और भविष्य में यहां एक लाख से ज्यादा पेड़ लगाए जाने की संभावना है।

सड़क चौड़ीकरण और विकास कार्यों के दौरान पेड़ों को दूसरी जगह लगाए जाने के बाद उनके नहीं पनपने के सवाल पर विजयवर्गीय ने कहा कि ऐसी स्थिति में दोबारा पौधारोपण करना होगा। उन्होंने नगर निगम और आईडीए को निर्देश दिए हैं कि एक पेड़ के बदले 10 पेड़ लगाए जाएं।

यानी एक ही दिन में कैलाश विजयवर्गीय के कई अलग-अलग अंदाज देखने को मिले। अमेरिका की नीति पर ‘ट्रंप फूफा’ वाला चुटीला तंज, 40 की उम्र के बाद शक्कर से दूरी की सलाह, कविता पाटीदार से जुड़ी पुरानी यादें और इंदौर को ‘क्लीन’ के बाद ‘ग्रीन’ बनाने का मिशन… यही वजह है कि उनके बयान एक बार फिर सुर्खियों में हैं।

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