सागर। मध्य प्रदेश पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ कार्रवाई करते हुए एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो बेरोजगार युवाओं और आम लोगों के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर फर्जी फर्म और म्यूल बैंक खाते खुलवाकर करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेन-देन कर रहा था।
पुलिस के मुताबिक, शुरुआती जांच में 16 से ज्यादा फर्जी फर्मों का पता चला है। इन फर्मों से जुड़े बैंक खातों में 5 करोड़ 50 लाख रुपये से अधिक के संदिग्ध ट्रांजेक्शन सामने आए हैं। मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि तीन अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है।
जांच में सामने आया है कि गिरोह के सदस्य बेरोजगार और सामान्य लोगों को पैसों का लालच देकर उनके जरूरी दस्तावेज हासिल करते थे। इसके बाद इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर फर्जी फर्म तैयार की जाती थीं और निजी बैंकों में उनके नाम से खाते खुलवाए जाते थे।
इन बैंक खातों का इस्तेमाल संदिग्ध वित्तीय लेन-देन के लिए किया जाता था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन खातों के जरिए रकम कहां से आती थी और आगे कहां भेजी जाती थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच के लिए एसआईटी यानी विशेष जांच दल का गठन किया जाएगा। पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर इस नेटवर्क के मुख्य सरगना और उससे जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस पूरे नेटवर्क से जुड़े कई और महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं। साथ ही लोगों से अपील की जा रही है कि पैसों के लालच में किसी अनजान व्यक्ति को अपने दस्तावेज या बैंक खाते से जुड़ी जानकारी न दें, क्योंकि उनके दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल साइबर अपराध में किया जा सकता है।

