गोरखपुर से बड़े दावों और नारों के साथ शुरू हुई स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की गविष्टि यात्रा अब सवालों के घेरे में आ गई है, बताया जा रहा है कि 3 मई को शुरू हुई इस यात्रा को पहले ही दिन अपेक्षित जनसमर्थन नहीं मिला, जिसके बाद इसकी दिशा बदलने की चर्चाएं तेज हो गई हैं, यात्रा फिलहाल कुशीनगर होते हुए देवरिया पहुंच चुकी है लेकिन संकेत मिल रहे हैं कि इसे बीच में ही रोका जा सकता है।
सूत्रों के मुताबिक उत्तर प्रदेश में यात्रा को जिस तरह का उत्साह और भीड़ मिलनी चाहिए थी, वह नहीं दिखी, इसी वजह से अब रणनीति में बड़ा बदलाव किया जा रहा है और पश्चिम बंगाल को नया केंद्र बनाने की तैयारी चल रही है, कहा जा रहा है कि बंगाल के बदले राजनीतिक माहौल को देखते हुए वहां गोवध और गोसंरक्षण के मुद्दे पर नया अभियान शुरू करने की योजना बनाई जा रही है।
अब सवाल यह उठ रहा है कि जिन राज्यों में लंबे समय से ये मुद्दे मौजूद थे, वहां अब तक दूरी क्यों बनाई गई और अचानक बंगाल पर फोकस क्यों किया जा रहा है, आलोचकों का मानना है कि यह कदम धार्मिक से ज्यादा राजनीतिक रणनीति का हिस्सा नजर आता है, जहां परिस्थितियों के हिसाब से मुद्दों को आगे बढ़ाया जा रहा है।
गोरखपुर में यात्रा की फीकी शुरुआत को भी इस बदलाव की बड़ी वजह माना जा रहा है, जहां बड़े जनसैलाब की उम्मीद थी, वहीं शुरुआत सीमित लोगों तक ही सिमट गई, जिससे पूरी टीम अब नई रणनीति पर काम कर रही है।
सूत्रों के अनुसार अगर यात्रा बंगाल की ओर जाती है तो वहां गोवध, पशु तस्करी और सीमा पार गतिविधियों को प्रमुख मुद्दा बनाया जाएगा, खासकर सीमावर्ती जिलों में पहले से चल रही बहस को बड़े अभियान में बदला जा सकता है।
राजनीतिक विश्लेषक इसे नैरेटिव शिफ्ट की रणनीति बता रहे हैं, जहां एक राज्य में कमजोर पड़ते मुद्दे को दूसरे राज्य में नए तरीके से पेश किया जाता है, बंगाल में हालिया चुनावी माहौल को देखते हुए इस कदम को उसी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
अब सबकी नजर इस पर टिकी है कि आने वाले दिनों में इस यात्रा को लेकर क्या फैसला लिया जाता है, क्योंकि संकेत साफ हैं कि अगर उत्तर प्रदेश में समर्थन नहीं बढ़ता है तो यात्रा को स्थगित कर बंगाल की ओर मोड़ने का ऐलान किया जा सकता है।

