जबलपुर। मध्य प्रदेश के विदिशा जिले से सामने आए उस वायरल वीडियो ने अब हाईकोर्ट का ध्यान खींच लिया है, जिसमें स्कूली बच्चे अपनी जान जोखिम में डालकर स्टॉप डैम पार करते नजर आए थे। इस गंभीर मामले पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए सख्त रुख अपनाया है और प्रशासन से जवाब तलब किया है।
हाईकोर्ट की एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रुसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव, लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव और विदिशा कलेक्टर को नोटिस जारी किया है। इसके साथ ही अदालत ने मामले में सहायता के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथ और एडवोकेट हिमांशु मिश्रा को कोर्ट मित्र नियुक्त किया है।
पूरा मामला विदिशा जिले की गुलाबगंज तहसील के पलोह, ककरुआ, इमलिया और बंधेरा गांव से जुड़ा है। पलोह स्थित शासकीय हाई स्कूल तक पहुंचने के लिए बच्चों के पास कोई सुरक्षित पुल या पक्का रास्ता नहीं है। मजबूरी में छात्र-छात्राएं बेतवा नदी पर बने स्टॉप डैम के संकरे और फिसलन भरे पिलरों पर संतुलन बनाकर रोजाना नदी पार कर स्कूल पहुंचते हैं।
हालांकि वहां एक वैकल्पिक रास्ता मौजूद है, लेकिन वह काफी लंबा होने की वजह से बच्चे रोज अपनी जान जोखिम में डालकर इस खतरनाक मार्ग का इस्तेमाल करने को मजबूर हैं। इसी दौरान बनाया गया वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसके बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया।
हाईकोर्ट की सख्ती के बाद जिला प्रशासन भी हरकत में आ गया है। फिलहाल स्टॉप डैम के दोनों ओर बैरिकेडिंग कर दी गई है और बच्चों को वहां जाने से रोकने के लिए चौकीदार की तैनाती की गई है।
अब इस मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर को होगी। अदालत ने सरकार और जिला प्रशासन से सुरक्षित मार्ग के निर्माण और बच्चों की सुरक्षा को लेकर विस्तृत जवाब मांगा है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान कब तक निकालता है।

