इंदौर में डेढ़ करोड़ के घी पर बड़ी कार्रवाई! 25 हजार लीटर स्टॉक की बिक्री पर रोक, मिलावट के खिलाफ प्रशासन का बड़ा एक्शन

इंदौर। मध्य प्रदेश में मिलावटी खाद्य पदार्थों के खिलाफ चल रहे विशेष अभियान के तहत इंदौर में खाद्य सुरक्षा प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। अधिकारियों ने करीब 25 हजार लीटर गोवर्धन ब्रांड घी के स्टॉक की बिक्री पर तत्काल रोक लगा दी है। इस स्टॉक की अनुमानित कीमत करीब डेढ़ करोड़ रुपये बताई जा रही है। जांच के दौरान घी के 20 अलग-अलग नमूने लेकर प्रयोगशाला भेजे गए हैं। अब रिपोर्ट आने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

यह कार्रवाई आयुक्त खाद्य सुरक्षा के निर्देश पर चल रहे विशेष अभियान के तहत की गई है। जुलाई 2026 से पूरे प्रदेश में दूध और दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता की जांच की जा रही है। खास तौर पर दूसरे राज्यों से आने वाले डेयरी उत्पादों पर कड़ी नजर रखी जा रही है। कुछ ब्रांडों के घी पहले अमानक पाए जाने के बाद निगरानी और सख्त कर दी गई थी।

इसी अभियान के तहत खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की टीम एबी रोड स्थित पराग मिल्क फूड्स लिमिटेड के डिपो पहुंची। जांच में पता चला कि यहां से गोवर्धन ब्रांड का घी पूरे मध्य प्रदेश में सप्लाई किया जाता है। प्रतिष्ठान केंद्रीय लाइसेंसधारी होने के कारण एफएसएसएआई की वेस्टर्न रीजन इंदौर टीम को भी मौके पर बुलाया गया। संयुक्त निरीक्षण के बाद करीब 25 हजार लीटर घी की बिक्री पर जांच पूरी होने तक रोक लगा दी गई।

कार्रवाई केवल यहीं तक सीमित नहीं रही। भावण्या इंटरप्राइजेज से गोपीश्री ब्रांड घी के चार नमूने भी जांच के लिए लिए गए। साथ ही करीब 312 लीटर घी, जिसकी कीमत लगभग 1 लाख 34 हजार रुपये है, उसे भी जांच रिपोर्ट आने तक जब्त कर लिया गया।

वहीं एक शिकायत के आधार पर विजयनगर स्थित एक रेस्टोरेंट का निरीक्षण किया गया, जहां रसोई में साफ-सफाई और स्वच्छता के मानकों का पालन नहीं मिला। इसके बाद प्रतिष्ठान को सुधार नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू की गई। यहां से पनीर, दही और मसालों के नमूने भी जांच के लिए भोपाल की राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला भेजे गए हैं।

महू क्षेत्र में भी खाद्य सुरक्षा टीम ने कार्रवाई करते हुए बेसन, मिठाई, शक्कर और नमकीन समेत कुल छह नमूने जांच के लिए एकत्र किए। प्रशासन का कहना है कि सभी नमूनों की रिपोर्ट आने के बाद यदि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

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