भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस में चल रही अंदरूनी खींचतान एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। पार्टी की प्रदेश महासचिव निधि सत्यव्रत चतुर्वेदी ने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह पर तीखा हमला बोलते हुए उनके सार्वजनिक बयानों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि उज्जैन भूमि विवाद और वीर भारत न्यास मामले में कौन सही है और कौन गलत, यह जांच का विषय हो सकता है, लेकिन जिस तरह एक वरिष्ठ नेता ने सार्वजनिक मंच से अपनी ही पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी का विरोध किया, उसने कार्यकर्ताओं को निराश किया है।
निधि चतुर्वेदी ने कहा कि यदि जीतू पटवारी से कोई गलती हुई भी थी, तो दिग्विजय सिंह उन्हें व्यक्तिगत रूप से या पार्टी के आंतरिक मंचों पर अपनी बात बता सकते थे। लेकिन प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सार्वजनिक रूप से प्रदेश अध्यक्ष के बयान का विरोध करना और उनके खिलाफ कठोर भाषा का इस्तेमाल करना उचित नहीं माना जा सकता।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरा विवाद व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं से जुड़ा हुआ है। उनका कहना है कि दिग्विजय सिंह का यह रवैया पार्टी हित से अधिक पारिवारिक राजनीति को प्राथमिकता देने जैसा दिखाई देता है। उन्होंने यह भी कहा कि जब कांग्रेस के कार्यकर्ता देशभर में पार्टी की विचारधारा के लिए संघर्ष कर रहे हैं, तब इस तरह के सार्वजनिक विवाद संगठन को कमजोर करने का काम करते हैं।
निधि चतुर्वेदी ने अपने बयान में यह भी कहा कि कांग्रेस जब भी मजबूती के साथ आगे बढ़ने की कोशिश करती है, ऐसे विवाद पार्टी के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर देते हैं। उन्होंने दावा किया कि व्यक्तिगत राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं और अंदरूनी खींचतान का असर पहले भी पार्टी को उठाना पड़ा है।
उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से मांग की कि संगठन की साख और कार्यकर्ताओं का मनोबल बनाए रखने के लिए इस पूरे मामले का संज्ञान लिया जाए और यदि आवश्यक हो तो पार्टी अनुशासन के तहत उचित कार्रवाई की जाए।
फिलहाल कांग्रेस के भीतर यह बयान नई राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि पार्टी नेतृत्व इस सार्वजनिक बयानबाजी और बढ़ते आंतरिक विवाद पर क्या रुख अपनाता है।

