इंदौर। नीट परीक्षा को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। एक तरफ देश के अलग-अलग हिस्सों में छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं, तो वहीं अब मध्य प्रदेश के झाबुआ से सामने आया एक मामला चर्चा का विषय बन गया है। यहां एक छात्र ने दावा किया है कि उसकी ओएमआर शीट के अनुसार उसे 305 अंक मिलने चाहिए थे, लेकिन एनटीए द्वारा जारी परिणाम में उसे सिर्फ 64 अंक दिए गए।
इसी को लेकर छात्र ने इंदौर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। छात्र का कहना है कि उसने परीक्षा के बाद जारी उत्तर कुंजी और अपनी ओएमआर शीट का मिलान किया, जिसमें उसके अंक 305 बन रहे थे। लेकिन अंतिम परिणाम घोषित होने पर अंक घटकर 64 रह गए।
याचिका में छात्र ने आरोप लगाया है कि यह एनटीए की मूल्यांकन प्रक्रिया या तकनीकी गड़बड़ी का मामला हो सकता है। छात्र का कहना है कि इस अंतर की वजह से उसका मेडिकल कॉलेज में प्रवेश प्रभावित हो रहा है और उसका भविष्य अधर में लटक गया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए इंदौर हाई कोर्ट ने भी सख्त रुख अपनाया है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने एनटीए को नोटिस जारी करते हुए छात्र की मूल ओएमआर शीट और मूल्यांकन से जुड़े आधिकारिक रिकॉर्ड पेश करने के निर्देश दिए हैं।
हाई कोर्ट ने कहा है कि मामले से जुड़े सभी दस्तावेज रिकॉर्ड पर लाए जाएं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि आखिर 305 अंक 64 कैसे हो गए। अब इस मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह होगी।
माना जा रहा है कि एनटीए द्वारा रिकॉर्ड पेश किए जाने के बाद पूरे मामले की तस्वीर साफ हो सकती है। फिलहाल, इस मामले ने एक बार फिर देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा की पारदर्शिता और मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब सभी की नजरें हाई कोर्ट की अगली सुनवाई और एनटीए के जवाब पर टिकी हुई हैं।

