भोपाल। मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में कई बड़े फैसलों पर मुहर लगी है। सरकार ने ग्रामीण विकास, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, डेयरी और किसानों से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी है। इन फैसलों का कुल वित्तीय असर 41 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा बताया गया है।
सबसे बड़ा फैसला ग्रामीण रोजगार और विकास से जुड़ा है। ‘विकसित भारत: वीबी जी राम जी योजना’ के मध्य प्रदेश में क्रियान्वयन के लिए करीब 29 हजार 619 करोड़ रुपये के वित्तीय प्रस्ताव का अनुसमर्थन किया गया है। नई व्यवस्था में ग्रामीण क्षेत्रों के इच्छुक वयस्क सदस्यों को एक वित्तीय वर्ष में 100 दिन के बजाय 125 दिन के श्रमजन्य रोजगार की वैधानिक गारंटी देने का प्रावधान है।
योजना के तहत ग्राम पंचायतों की विकास योजनाएं जीआईएस तकनीक, पीएम गति शक्ति लेयर्स और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के इस्तेमाल से तैयार की जाएंगी। पारदर्शिता के लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति, डिजिटल मस्टर रोल और हर छह महीने में सामाजिक अंकेक्षण अनिवार्य किया गया है। साथ ही हर जिले में शिकायतों के निपटारे के लिए लोकपाल की नियुक्ति की जाएगी।
अब बात करते हैं सड़क कनेक्टिविटी की। कैबिनेट ने पश्चिम भोपाल बायपास के 35.61 किलोमीटर लंबे फोरलेन निर्माण के लिए संशोधित वित्तीय स्वीकृति दी है। इस परियोजना की कुल वित्तीय लागत करीब 3 हजार 225 करोड़ 51 लाख रुपये है, जबकि निर्माण पूर्व गतिविधियों के लिए 548 करोड़ 29 लाख रुपये के भुगतान को भी मंजूरी दी गई है। इस बायपास के बनने के बाद जबलपुर और नर्मदापुरम की ओर से इंदौर जाने वाले वाहनों को भोपाल शहर से होकर नहीं गुजरना पड़ेगा और करीब 21 किलोमीटर की दूरी भी कम होगी।
शिक्षा के क्षेत्र में भी कैबिनेट ने बड़ा बदलाव किया है। वर्तमान राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय यानी RGPV का पुनर्गठन कर प्रदेश में तीन अलग-अलग प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय स्थापित करने की मंजूरी दी गई है। ये विश्वविद्यालय भोपाल, उज्जैन और जबलपुर में होंगे।
भोपाल के विश्वविद्यालय का नाम ‘मध्य भारत प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय’, उज्जैन के संस्थान का नाम ‘मालवा प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय’ और जबलपुर के संस्थान का नाम ‘महाकौशल प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय’ रखा जाएगा। मौजूदा RGPV के अंतर्गत 585 संस्थानों में 3 लाख 83 हजार से ज्यादा विद्यार्थी अध्ययन कर रहे हैं। अब तकनीकी संस्थानों को संभागवार इन तीन विश्वविद्यालयों के क्षेत्राधिकार में बांटा जाएगा।
डेयरी सेक्टर के लिए भी कैबिनेट ने बड़ा फैसला लिया है। दुग्ध उत्पादकों के आर्थिक सशक्तिकरण और सांची ब्रांड के उन्नयन के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड यानी NDDB के सहयोग से 2 हजार 973 करोड़ रुपये की डेयरी विकास योजना को मंजूरी दी गई है।
इस योजना के तहत अगले पांच वर्षों में सहकारी दुग्ध समितियों का विस्तार 7 हजार 331 गांवों से बढ़ाकर 26 हजार गांवों तक किया जाएगा। दूध संग्रहण क्षमता को 12 लाख किलोग्राम प्रतिदिन से बढ़ाकर 52 लाख किलोग्राम और प्रसंस्करण क्षमता को 17.8 लाख लीटर से बढ़ाकर 63.3 लाख लीटर प्रतिदिन करने का लक्ष्य रखा गया है।
स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी सरकार ने राशि मंजूर की है। चिकित्सा संस्थानों में मशीनों और उपकरणों के रखरखाव के लिए 488 करोड़ 41 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है। वहीं चिकित्सा संस्थानों की विभागीय परिसंपत्तियों के रखरखाव के लिए 915 करोड़ 77 लाख रुपये मंजूर किए गए हैं।
किसानों के लिए भी कैबिनेट से अहम फैसला आया है। ग्रीष्मकालीन मूंग की खरीदी के लिए पहले तय 25 प्रतिशत की सीमा को बढ़ाकर 60 प्रतिशत तक करने के निर्णय का अनुसमर्थन किया गया है।
इसके अलावा नवगठित जिलों में प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत करने के लिए सामाजिक न्याय और दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग तथा आयुष विभाग में नए पदों के सृजन को भी मंजूरी दी गई है।
यानी मध्य प्रदेश कैबिनेट के इन फैसलों में एक तरफ ग्रामीण रोजगार, सड़क और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं पर जोर दिया गया है, तो दूसरी तरफ तकनीकी शिक्षा, डेयरी और किसानों की आय से जुड़े क्षेत्रों में भी बड़े बदलाव की तैयारी दिखाई दे रही है। अब इन फैसलों का असर जमीन पर कितना दिखाई देता है, यह आने वाले समय में देखने वाली बात होगी।

