₹66 करोड़ के बैंक लोन केस में ED का बड़ा एक्शन! रुचि ग्लोबल पर अभियोजन शिकायत, 21 आरोपी-इकाइयों को नोटिस; PMLA कोर्ट में बढ़ी हलचल
इंदौर। रुचि ग्लोबल लिमिटेड से जुड़े बैंक लोन मामले में प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने कार्रवाई आगे बढ़ाते हुए विशेष PMLA कोर्ट, इंदौर के समक्ष अभियोजन शिकायत दाखिल की है। कंपनी अब Agrotrade Enterprises Ltd. के नाम से जानी जाती है। मामले में 21 आरोपी व्यक्तियों और संस्थाओं को अदालत की प्रक्रिया का सामना करना पड़ रहा है।
ED की जांच में फर्जी और कथित तौर पर हेरफेर किए गए दस्तावेजों के आधार पर बैंकिंग सुविधाएं और Letter of Credit (LC) हासिल करने तथा रकम को संबंधित संस्थाओं और खातों के जरिए ट्रांसफर करने के आरोपों की जांच की गई है। अदालत ने मामले में संबंधित पक्षों को प्री-कॉग्निजेंस सुनवाई के लिए नोटिस जारी किए हैं।
कृषि उत्पादों की खरीद के नाम पर LC सुविधा का आरोप
ED के मुताबिक, रुचि ग्लोबल से जुड़े मामले में कृषि उत्पादों की वास्तविक खरीद-बिक्री के आधार पर LC सुविधा लेने का दावा किया गया था। जांच एजेंसी का आरोप है कि इन लेनदेन के पीछे वास्तविक कारोबारी गतिविधि नहीं थी और इसके लिए कथित तौर पर फर्जी, तैयार किए गए और हेरफेर वाले दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया।
ED के अनुसार, इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर बैंकिंग सिस्टम से रकम हासिल की गई और बाद में धनराशि को विभिन्न संबंधित संस्थाओं तथा खातों के बीच ट्रांसफर किया गया।
बैंक से निकली रकम फिर कंपनी से जुड़े खातों तक पहुंचने का दावा
जांच एजेंसी के मुताबिक, धनराशि को अलग-अलग संबंधित संस्थाओं के खातों में भेजा गया और लेनदेन की एक ऐसी श्रृंखला सामने आई, जिसमें रकम कुछ समय बाद दोबारा कंपनी से जुड़े खातों तक पहुंचती दिखाई दी।
ED ने इसे कथित तौर पर रकम के डायवर्जन, लेयरिंग और रूटिंग से जोड़कर जांच की है। जांच का प्रमुख हिस्सा यह पता लगाना रहा कि बैंकिंग सुविधा से हासिल रकम का वास्तविक इस्तेमाल कहां हुआ और विभिन्न खातों के बीच धनराशि की आवाजाही का उद्देश्य क्या था।
CBI की FIR से शुरू हुई ED की जांच
ED ने इस मामले में जांच CBI की FIR के आधार पर शुरू की थी। ED की फरवरी 2026 की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, CBI की FIR में रुचि ग्लोबल लिमिटेड पर बैंक कंसोर्टियम को 188.35 करोड़ रुपये से अधिक का कथित नुकसान पहुंचाने से जुड़े आरोपों की जांच की जा रही थी।
ED के अनुसार, कंपनी पर क्रेडिट सुविधाएं और LC कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हासिल करने तथा रकम को संबंधित कंपनियों के जरिए डायवर्ट और रूट करने के आरोपों की जांच की गई।
दिसंबर 2025 में इंदौर-मुंबई में छापेमारी
मामले में ED ने 23 दिसंबर 2025 को इंदौर और मुंबई में कई ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया था। ED के मुताबिक, कार्रवाई के दौरान 23 लाख रुपये से अधिक की नकदी, आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस बरामद किए गए थे। आरोपियों और उनके परिवार के सदस्यों से जुड़े 20 लाख रुपये से अधिक के बैंक बैलेंस भी फ्रीज किए गए थे।
₹5.13 करोड़ की संपत्ति भी हो चुकी है अटैच
जांच आगे बढ़ने के बाद ED ने 17 फरवरी 2026 को PMLA के तहत करीब ₹5.13 करोड़ की अचल संपत्ति अस्थायी रूप से अटैच की थी। ED के अनुसार यह जमीन नीता शाहरा के नाम पर दर्ज थी।
ED ने अपनी कार्रवाई में कहा था कि कथित तौर पर डायवर्ट और लेयर किए गए धन का इस्तेमाल विभिन्न संपत्तियां हासिल करने में किया गया।
अब 21 आरोपी और संस्थाएं अदालत की प्रक्रिया में
ताजा अभियोजन शिकायत के बाद मामले में शामिल 21 आरोपी व्यक्तियों और संस्थाओं को अदालत की प्रक्रिया का सामना करना होगा। अब कोर्ट के सामने ED की ओर से पेश किए गए दस्तावेज, बैंकिंग ट्रेल और कथित लेनदेन की श्रृंखला महत्वपूर्ण होगी।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि ED की जांच में लगाए गए आरोप अभी न्यायिक परीक्षण के अधीन हैं। किसी भी आरोपी की दोषसिद्धि अदालत के अंतिम निर्णय के बाद ही मानी जाएगी।
असली कारोबार या कागजों पर लेनदेन? जांच का बड़ा सवाल
रुचि ग्लोबल मामले में ED की जांच का एक अहम पहलू यह है कि कृषि उत्पादों की खरीद के नाम पर दिखाए गए लेनदेन वास्तव में वास्तविक कारोबारी गतिविधियों से जुड़े थे या नहीं। इसके साथ ही बैंक से निकली रकम किन-किन खातों में गई और संबंधित संस्थाओं के बीच धनराशि की आवाजाही क्यों हुई, इसकी पड़ताल भी जांच का हिस्सा है।
अब 21 आरोपी व्यक्तियों और संस्थाओं को नोटिस जारी होने के बाद मामला PMLA कोर्ट में आगे बढ़ेगा, जहां अभियोजन शिकायत और उससे जुड़े दस्तावेजों के आधार पर न्यायिक प्रक्रिया आगे चलेगी।