लखनऊ. उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव से पहले योगी सरकार ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए पिछड़ा वर्ग आयोग यानी UP OBC आयोग का गठन कर दिया है। योगी कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद अब रिटायर्ड जस्टिस राम अवतार सिंह की अध्यक्षता में आयोग का गठन किया गया है। उनके साथ आयोग में चार अन्य सदस्यों की भी नियुक्ति की गई है।
बता दें कि राम अवतार सिंह इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश रह चुके हैं। आयोग में शामिल चार सदस्यों में दो रिटायर्ड अपर जिला जज और दो रिटायर्ड आईएएस अधिकारी शामिल हैं। सभी सदस्यों का कार्यकाल फिलहाल 6 महीने का रखा गया है।
दरअसल 18 मई को हुई योगी कैबिनेट की बैठक में आयोग गठन के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी। इसके बाद अब आधिकारिक तौर पर आयोग का गठन कर दिया गया है। माना जा रहा है कि पंचायत चुनाव से पहले यह फैसला बेहद अहम माना जा रहा है।
गौरतलब है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के आदेश के बाद इस आयोग का गठन किया गया है। आयोग की रिपोर्ट के आधार पर ही उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव कराए जाएंगे। ऐसे में अब सभी की नजर आयोग की सिफारिशों पर टिकी हुई है।
अगर बात करें आयोग के अध्यक्ष राम अवतार सिंह की तो उनका जन्म 15 जनवरी 1949 को बिजनौर में हुआ था। उन्होंने साल 1976 में पीसीएस न्यायिक सेवा से अपने करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद 1991 में उच्च न्यायिक सेवा में प्रमोट हुए और 2005 में जिला जज बने। 13 अप्रैल 2009 को उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट में अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। इससे पहले साल 2022 में भी वे यूपी OBC आयोग के अध्यक्ष रह चुके हैं।
अब बात आयोग के काम की करें तो आयोग सबसे पहले स्थानीय निकायों, ब्लॉक और पंचायत स्तर पर पिछड़ी जातियों की आबादी का आंकड़ा जुटाएगा। साथ ही यह भी तय करेगा कि पिछड़े वर्गों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व की कितनी जरूरत है।
आयोग यह भी सुनिश्चित करेगा कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग को मिलाकर कुल आरक्षण 50 प्रतिशत से ज्यादा न हो। आयोग की सिफारिशों के आधार पर ही स्थानीय निकायों में OBC आरक्षण का अनुपात और आरक्षित सीटों की संख्या तय की जाएगी।

