इंदौर। विभाजन विभीषिका दिवस के मौके पर इंदौर में मध्यप्रदेश के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने 1947 के भारत विभाजन को लेकर तत्कालीन नेतृत्व पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि देश की आजादी के पीछे सिर्फ जश्न की कहानी नहीं थी, बल्कि इसके साथ लाखों लोगों का दर्द, विस्थापन और हिंसा की भयावह त्रासदी भी जुड़ी हुई थी।
कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2021 में 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी। इसका उद्देश्य विभाजन के दौरान पीड़ित लोगों के संघर्ष, पीड़ा और बलिदान को याद करना है।
विजयवर्गीय ने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पर निशाना साधते हुए कहा कि देश के विभाजन का फैसला जल्दबाजी में लिया गया। उन्होंने कहा कि विभाजन के बाद बड़े पैमाने पर लोगों का विस्थापन हुआ, लेकिन विस्थापित लोगों के पुनर्वास और सुरक्षा के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई।
उन्होंने कहा कि विभाजन के दौरान लाखों लोगों को अपना घर, जमीन और संपत्ति छोड़कर अनजान जगहों पर जाना पड़ा। उनके मुताबिक यह विस्थापन विश्व इतिहास की बड़ी मानवीय त्रासदियों में से एक था।
विजयवर्गीय ने कहा कि आज की पीढ़ी को यह जानना जरूरी है कि जिस आजादी का देश जश्न मनाता है, उसके पीछे कितना दर्द और चीत्कार छिपा हुआ था। उन्होंने विभाजन के दौरान हुई हिंसा और बड़ी संख्या में लोगों की मौत का जिक्र करते हुए कहा कि इस त्रासदी को इतिहास से मिटाया नहीं जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सवाल सिर्फ देश के विभाजन का नहीं है, बल्कि उस फैसले की तैयारी और उसके दूरगामी परिणामों का भी है। इतनी बड़ी संख्या में लोगों के विस्थापन की स्थिति बनने के बावजूद उनके पुनर्वास और सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं किए गए, इस पर गंभीरता से विचार होना चाहिए।
कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि विभाजन विभीषिका दिवस सिर्फ अतीत को याद करने का दिन नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को उस दौर की सच्चाई और पीड़ा से परिचित कराने का अवसर भी है। इतिहास से सबक लेकर ऐसी परिस्थितियों को दोबारा पैदा होने से रोकने की दिशा में आगे बढ़ना जरूरी है।
उन्होंने राजनीतिक दलों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि अतीत की त्रासदी से सबक लेकर तुष्टीकरण की राजनीति से आगे बढ़ने और विकसित भारत के लक्ष्य पर ध्यान देने की जरूरत है।
विभाजन विभीषिका दिवस पर कैलाश विजयवर्गीय का यह बयान 1947 के विभाजन, तत्कालीन नेतृत्व के फैसलों और उसके बाद हुए विस्थापन को लेकर राजनीतिक बहस को एक बार फिर तेज करता नजर आया। अब इस बयान पर कांग्रेस और विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया क्या आती है, यह देखना अहम होगा।

