कैलाश विजयवर्गीय के कथित पत्र पर सियासी संग्राम, सज्जन वर्मा का तंज- ‘इंदौर को नया महामंडलेश्वर मिल जाएगा’

इंदौर। मध्य प्रदेश की राजनीति में एक कथित पत्र को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। मुख्यमंत्री के नाम लिखे गए बताए जा रहे एक वायरल पत्र को लेकर नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने साफ इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री को ऐसा कोई पत्र नहीं लिखा और वायरल हो रहे दस्तावेज से उनका कोई संबंध नहीं है। साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि जिस माध्यम से यह खबर सामने आई, वह यह बताए कि यह कथित पत्र आखिर उनके पास पहुंचा कैसे।

कैलाश विजयवर्गीय के इस बयान के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने उन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जब एक बड़े अखबार ने इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया है तो इसकी सच्चाई भी सामने आनी चाहिए। वर्मा ने सवाल उठाया कि यदि मंत्री को अपने विभाग की समस्याएं पहले से दिखाई दे रही थीं तो ढाई साल तक उन्होंने इस पर आवाज क्यों नहीं उठाई।

सज्जन वर्मा ने आरोप लगाया कि प्रदेश में जलभराव, दूषित पेयजल और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं लंबे समय से बनी हुई हैं, लेकिन अब अचानक इन मुद्दों पर चर्चा की जा रही है।

उन्होंने कैलाश विजयवर्गीय के पुराने बयान का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने खुद को “हाथ कटा ठाकुर” बताया था। इस पर तंज कसते हुए सज्जन वर्मा ने कहा कि अगर उन्हें लगता था कि उनके पास अधिकार नहीं हैं तो उन्हें मंत्री पद छोड़ देना चाहिए था। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि पितृ पर्वत पर उनके बैठने की पूरी व्यवस्था है, वहां जाकर हनुमान जी की सेवा करें तो इंदौर को एक नया महामंडलेश्वर मिल जाएगा। साथ ही उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि बस इतना ध्यान रहे कि वहां चंदे में कोई गड़बड़ी न हो।

सज्जन वर्मा ने कांग्रेस की पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी की बैठक का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बैठक में राहुल गांधी के उस बयान पर चर्चा हुई, जिसमें पार्टी के भीतर मौजूद कथित “स्लीपर सेल” की पहचान कर उन्हें बाहर करने की बात कही गई थी। उनके मुताबिक, प्रदेश कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी ने भी कार्यकर्ताओं को इस मुद्दे पर सतर्क रहने की सलाह दी है।

दिग्विजय सिंह के ‘दलाल’ शब्द वाले बयान पर भी सज्जन वर्मा ने सफाई दी। उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह किसी व्यक्ति के उपनाम का उल्लेख कर रहे थे, लेकिन शब्दों के चयन की वजह से विवाद पैदा हो गया। बाद में दिग्विजय सिंह और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी।

फिलहाल इस कथित पत्र को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है और यह मामला अब प्रदेश की राजनीति में चर्चा का बड़ा मुद्दा बन चुका है।

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