भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के दौरे से पहले राजनीतिक माहौल अचानक गरमा गया। NEET पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच भोपाल में भी युवक कांग्रेस और NSUI द्वारा बड़े प्रदर्शन की तैयारी की जा रही थी। इसी आशंका को देखते हुए पुलिस ने सुबह से ही कार्रवाई शुरू कर दी और कई कांग्रेस नेताओं को प्रदर्शन से पहले ही हिरासत में ले लिया।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होने भोपाल पहुंचे थे। उनके दौरे को लेकर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। इसी दौरान युवक कांग्रेस के भोपाल शहर अध्यक्ष अमित खत्री और प्रदेश उपाध्यक्ष अभिषेक परमार को उनके घरों से ही हिरासत में ले लिया गया। वहीं प्रदेश कांग्रेस कार्यालय के बाहर मौजूद कई अन्य कार्यकर्ताओं और नेताओं को भी पुलिस ने अपनी निगरानी में ले लिया।
इस कार्रवाई की जद में NSUI के बड़े नेता भी आए। NSUI के प्रदेश अध्यक्ष आशुतोष चौकसे और संगठन के प्रवक्ता अभिनव बरोलिया को भी पुलिस ने हिरासत में लिया। सभी नेताओं को टीटी नगर थाने में रखा गया, जहां कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पुलिस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया।
दरअसल, NEET पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में छात्रों और विपक्षी दलों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। युवक कांग्रेस और NSUI केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही हैं। भोपाल में भी इसी मुद्दे को लेकर बड़े विरोध प्रदर्शन की तैयारी थी, लेकिन पुलिस की कार्रवाई ने प्रदर्शन शुरू होने से पहले ही राजनीतिक तनाव बढ़ा दिया।
इस पूरे घटनाक्रम पर मध्य प्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। केंद्रीय शिक्षा मंत्री द्वारा छात्रों से NEET परीक्षा को लेकर भरोसा बनाए रखने की अपील पर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा कि देश के करोड़ों युवाओं ने सरकार और शिक्षा व्यवस्था पर भरोसा करके दिन-रात मेहनत की, लेकिन लगातार पेपर लीक की घटनाओं ने उस विश्वास को तोड़ दिया है।
उमंग सिंघार ने कहा कि छात्र केवल परीक्षा नहीं देते, बल्कि अपने भविष्य के सपनों को दांव पर लगाते हैं। ऐसे में जब बार-बार परीक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं, तो युवाओं का मनोबल टूटता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार केवल आश्वासन दे रही है, जबकि छात्र जवाब और जिम्मेदारी तय होने की मांग कर रहे हैं।
नेता प्रतिपक्ष ने मऊगंज की छात्रा आकांक्षा का जिक्र करते हुए कहा कि उसकी मौत केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि व्यवस्था की विफलता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भोपाल में मंचों से भरोसा दिलाने से पहले सरकार को उन परिवारों के दर्द को समझना चाहिए, जिनके बच्चों के सपने इस अव्यवस्था की भेंट चढ़ गए।
उमंग सिंघार ने कहा कि सिर्फ दोबारा परीक्षा आयोजित कराना समस्या का समाधान नहीं है। देश का युवा यह जानना चाहता है कि बार-बार होने वाली ऐसी घटनाओं के लिए जिम्मेदार कौन है और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई कब होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि सरकार परीक्षा व्यवस्था को सुरक्षित नहीं बना सकती, तो युवाओं से भरोसा रखने की अपील करना उनके जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है।
भोपाल में शिक्षा मंत्री के दौरे के दौरान हुई यह राजनीतिक हलचल अब प्रदेश की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गई है। एक ओर सरकार परीक्षा प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बताने का प्रयास कर रही है, तो दूसरी ओर विपक्ष युवाओं के भविष्य को लेकर सरकार को कठघरे में खड़ा कर रहा है। आने वाले दिनों में यह विवाद और अधिक सियासी रंग ले सकता है।

