भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस में अनुशासनात्मक कार्रवाई को लेकर शुरू हुआ विवाद अब और गहरा गया है। कारण बताओ नोटिस जारी होने के बाद पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। कांग्रेस महिला उत्पीड़न प्रकोष्ठ की प्रदेश अध्यक्ष प्रियंका करार और किसान कांग्रेस के प्रदेश महासचिव सुरेश पटेल धाकड़ ने पार्टी नेतृत्व पर गंभीर सवाल उठाते हुए भेदभाव के आरोप लगाए हैं।
नोटिस मिलने के बाद प्रियंका करार ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने खुद को पार्टी की ईमानदार कार्यकर्ता बताते हुए लिखा कि वह पार्टी के भीतर कथित सौदेबाजी करने वाले नेताओं के खिलाफ हमेशा आवाज उठाती रहेंगी। उन्होंने कहा कि जब राहुल गांधी खुद कहते हैं “सच बोलो, डरो मत”, तो क्या अब कांग्रेस में सच बोलने वालों को नोटिस देकर चुप कराया जाएगा?
प्रियंका करार ने यह भी सवाल उठाया कि यदि पार्टी में अनुशासन के नियम सभी पर समान रूप से लागू हैं, तो फिर प्रदेश अध्यक्ष के खिलाफ बयान देने वाले पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, दिग्विजय सिंह पर टिप्पणी करने वाले पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा और विधायक आरिफ मसूद को नोटिस क्यों नहीं दिया गया? उन्होंने आरोप लगाया कि कार्रवाई केवल चुनिंदा लोगों पर की जा रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के कुछ जिला अध्यक्ष कथित तौर पर संगठन की गाइडलाइन का उल्लंघन करते हुए टीवी डिबेट में हिस्सा लेते हैं, लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती। प्रियंका करार ने आरोप लगाया कि पार्टी में ऐसे नेताओं को संरक्षण दिया जा रहा है, जो संगठन को नुकसान पहुंचा रहे हैं या गुटबाजी को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह नोटिस का जवाब पूरे तथ्यों के साथ देंगी।
इस विवाद में किसान कांग्रेस के प्रदेश महासचिव सुरेश पटेल धाकड़ भी खुलकर सामने आए। उन्होंने कहा कि यदि अनुशासन के नियम बनाए गए हैं तो उनका पालन बड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं, दोनों पर समान रूप से होना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कार्रवाई केवल छोटे कार्यकर्ताओं तक ही सीमित रहेगी, जबकि गुटबाजी करने वाले बड़े नेताओं पर कोई कदम नहीं उठाया जाएगा?
सुरेश पटेल ने कहा कि आज पार्टी के भीतर सही बात कहना भी मुश्किल होता जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि हर बार कार्रवाई का निशाना कार्यकर्ता बनता है, जबकि बड़े नेताओं के खिलाफ चुप्पी साध ली जाती है।
दो प्रदेश स्तरीय पदाधिकारियों द्वारा खुलकर पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाए जाने के बाद मध्य प्रदेश कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति एक बार फिर चर्चा में आ गई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस विवाद के और गहराने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

