भोपाल। मध्यप्रदेश में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण को लेकर सरकार ने विशेष अभियान शुरू करने का फैसला किया है, लेकिन अभियान की घोषणा होते ही इस पर सियासत भी शुरू हो गई है।
29 अगस्त से 4 सितंबर तक चलने वाले इस अभियान के तहत आंगनबाड़ियों और स्कूलों में बच्चों की स्वास्थ्य जांच की जाएगी। बच्चों को पौष्टिक भोजन भी दिया जाएगा। महिला एवं बाल विकास विभाग और स्वास्थ्य विभाग मिलकर इस अभियान को संचालित करेंगे।
सरकार की योजना सिर्फ स्वास्थ्य और पोषण तक सीमित नहीं है। जन्माष्टमी के अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े स्थलों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे और ‘कृष्ण गमन पथ’ के जरिए धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की तैयारी भी की जा रही है।
लेकिन कांग्रेस ने इसी अभियान को लेकर सरकार पर निशाना साध दिया है।
कांग्रेस प्रवक्ता अभिनव बरोलिया ने सरकार के इस फैसले को ‘दिखावा और ड्रामेबाजी’ बताते हुए आरोप लगाया कि मध्यप्रदेश कुपोषण और पोषण आहार से जुड़े विवादों के लिए जाना जाता है। उन्होंने बालाघाट में बच्चों की मौत के मामलों का हवाला देते हुए सरकार से जमीनी स्तर पर काम करने की मांग की।
कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा सरकार बच्चों की समस्याओं का स्थायी समाधान करने के बजाय त्योहारों की आड़ में इवेंटबाजी कर रही है। पार्टी ने यह भी दावा किया कि सरकार की नीतियों का असर प्रदेश के बच्चों के भविष्य पर पड़ रहा है।
अब भाजपा ने कांग्रेस के इन आरोपों पर पलटवार किया है।
भाजपा प्रवक्ता अजय सिंह यादव ने कांग्रेस के बयान को विपक्ष की ओछी मानसिकता बताया। उनका कहना है कि बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण जैसे संवेदनशील मुद्दे को राजनीति से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
भाजपा का कहना है कि जन्माष्टमी के अवसर पर बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य और पोषण के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। ऐसे जनकल्याणकारी अभियान का स्वागत करने के बजाय कांग्रेस द्वारा सवाल उठाना उसकी निम्नस्तरीय राजनीति को दिखाता है।
भाजपा ने साफ कहा कि बच्चों का स्वास्थ्य और उनका पोषण राजनीति का विषय नहीं होना चाहिए।
फिलहाल जन्माष्टमी के मौके पर शुरू होने जा रहे इस अभियान को लेकर एक तरफ सरकार बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण को लेकर अपनी पहल बता रही है, तो दूसरी तरफ विपक्ष इसे महज इवेंटबाजी करार दे रहा है।
अब सवाल यही है कि 4 सितंबर तक चलने वाला यह अभियान जमीन पर बच्चों को कितना फायदा पहुंचाता है और स्वास्थ्य एवं पोषण को लेकर सरकार के दावों का कितना असर दिखाई देता है। साथ ही यह भी देखना होगा कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी बयानबाजी और कितनी तेज होती है।

