भोपाल। मध्य प्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं। डॉ. मोहन यादव सरकार ने चुनावी तैयारियों को गति देते हुए प्रशासनिक स्तर पर महत्वपूर्ण कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की ओर से जारी आदेश के बाद प्रदेशभर के नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर परिषदों में चुनावी प्रक्रिया को लेकर हलचल बढ़ गई है।
जारी निर्देशों के मुताबिक मध्य प्रदेश के सभी 16 नगर निगमों सहित नगर पालिकाओं और नगर परिषदों के चुनाव जुलाई 2027 में एक साथ कराए जाने की तैयारी की जा रही है। चुनाव को समयबद्ध और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए सरकार ने आरक्षण प्रक्रिया शुरू करने की दिशा में भी कदम बढ़ा दिए हैं।
महापौर और अध्यक्ष पदों के आरक्षण की प्रक्रिया को सुचारू रूप से पूरा करने के लिए अधिकारियों की नियुक्ति कर दी गई है। नगरीय प्रशासन विभाग ने आयुक्त नगरीय प्रशासन को इस पूरी प्रक्रिया का नोडल अधिकारी नियुक्त किया है। उनकी निगरानी में आरक्षण से जुड़ी सभी प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी, ताकि चुनाव कार्यक्रम घोषित होने से पहले सभी तैयारियां पूरी हो सकें।
इस बार के नगरीय निकाय चुनाव कई मायनों में अलग और अहम साबित होने वाले हैं। मोहन सरकार ने चुनावी नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए नगर परिषद अध्यक्षों के चुनाव की प्रक्रिया में संशोधन किया है। नए नियमों के तहत अब नगर परिषद अध्यक्षों का चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से होगा। यानी अब जनता पार्षदों के जरिए नहीं, बल्कि सीधे मतदान करके अपने नगर परिषद अध्यक्ष का चुनाव करेगी।
सरकार के इस फैसले को स्थानीय राजनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। माना जा रहा है कि प्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली लागू होने से चुनावी रणनीतियां बदलेंगी और उम्मीदवारों को सीधे जनता के बीच जाकर समर्थन हासिल करना होगा। इससे स्थानीय स्तर पर राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और भी दिलचस्प हो सकती है।
नगरीय प्रशासन विभाग का कहना है कि आरक्षण प्रक्रिया और अन्य जरूरी प्रशासनिक कार्य समय पर पूरे किए जाएंगे, ताकि जुलाई 2027 में निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सभी नगरीय निकायों के चुनाव शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराए जा सकें। अब चुनावी तैयारियों के साथ-साथ राजनीतिक दलों ने भी अपनी रणनीति बनाना शुरू कर दिया है और आने वाले समय में प्रदेश की नगरीय राजनीति का माहौल और गर्म होने की संभावना है।

