भोपाल। मध्य प्रदेश में आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। 18 जून को होने वाले चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी उम्मीदवारों के चयन को लेकर अंतिम रणनीति बनाने में जुटी हुई है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश संगठन के वरिष्ठ नेताओं ने दिल्ली पहुंचकर पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ महत्वपूर्ण बैठक की, जहां संभावित उम्मीदवारों के नामों पर विस्तार से चर्चा हुई।
सूत्रों के मुताबिक राज्यसभा की खाली हो रही सीटों को लेकर भाजपा बेहद सावधानी से कदम बढ़ा रही है। दिल्ली में हुई बैठक के दौरान प्रदेश नेतृत्व ने संभावित नामों पर अपना फीडबैक दिया और पार्टी आलाकमान ने विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए अंतिम मंथन किया। बताया जा रहा है कि कुछ नामों पर सहमति बन चुकी है और अब आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।
राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान 18 जून को होना है, ऐसे में माना जा रहा है कि भाजपा अगले एक-दो दिनों के भीतर अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर सकती है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पार्टी इस बार कुछ नए चेहरों या विशेष सामाजिक वर्गों का प्रतिनिधित्व करने वाले नेताओं को मौका देकर सभी को चौंका सकती है।
वहीं यह भी माना जा रहा है कि भाजपा कांग्रेस की रणनीति पर भी नजर बनाए हुए है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस की ओर से उम्मीदवारों के नाम सामने आने के बाद भाजपा अपनी अंतिम रणनीति तय कर सकती है। यदि मुकाबले की स्थिति बनती है तो चुनावी समीकरण और भी दिलचस्प हो सकते हैं।
संख्या बल की बात करें तो मध्य प्रदेश विधानसभा में कुल 230 सीटें हैं। वर्तमान में भाजपा के पास 164 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के खाते में 64 विधायक हैं। एक सीट भारत आदिवासी पार्टी के पास है और एक सीट रिक्त है। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 58 वोटों की आवश्यकता होती है। मौजूदा गणित के आधार पर भाजपा के दो और कांग्रेस के एक उम्मीदवार की जीत लगभग तय मानी जा रही है।
अब सभी की नजरें भाजपा और कांग्रेस की आधिकारिक उम्मीदवार सूची पर टिकी हैं। आने वाले एक-दो दिन मध्य प्रदेश की राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं, क्योंकि इन्हीं नामों के साथ राज्यसभा चुनाव की तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी।

