रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा में प्रसूता कल्पना मिश्रा की मौत का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। बुधवार को मृतका के परिजनों और समर्थकों ने निजी अस्पतालों के बाहर प्रदर्शन किया और तालाबंदी की मांग उठाई। इसी दौरान प्रदर्शनकारी संजय गांधी अस्पताल के नवनियुक्त अधीक्षक डॉ. प्रियंक शर्मा के निजी अस्पताल सिटी हॉस्पिटल के बाहर भी पहुंच गए। यहां प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई।
इस पूरे घटनाक्रम का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें पुलिसकर्मी आम आदमी पार्टी के नेता प्रमोद शर्मा को पकड़कर मौके से ले जाते नजर आ रहे हैं। कार्रवाई के दौरान कुछ महिलाओं समेत कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की भी बात सामने आई है।
सीएसपी राजीव पाठक के मुताबिक, बिना पूर्व सूचना के बड़ी संख्या में लोग निजी अस्पताल के बाहर एकत्र होकर हंगामा कर रहे थे। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की, लेकिन स्थिति नियंत्रित नहीं होने पर कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया और धारा 151 के तहत कार्रवाई की गई।
वहीं प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे कल्पना मिश्रा की मौत के मामले में न्याय और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों ने निजी अस्पतालों की भूमिका की जांच कराने और अस्पतालों की तालाबंदी की मांग भी उठाई।
फिलहाल पुलिस कार्रवाई को लेकर दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे सामने आए हैं। हिरासत में लिए गए लोगों की आधिकारिक संख्या और आगे की कार्रवाई को लेकर तस्वीर पूरी तरह साफ होना अभी बाकी है।
दरअसल, 25 अगस्त 2026 को कल्पना मिश्रा को डिलीवरी के लिए रीवा के संजय गांधी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अगले दिन 26 अगस्त की रात ऑपरेशन के बाद कल्पना मिश्रा और उनके नवजात बच्चे की मौत हो गई थी। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए थे। मौत से पहले का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था।
इस घटना के बाद रीवा से लेकर राजधानी भोपाल तक विरोध प्रदर्शन देखने को मिले। सामाजिक संगठनों के साथ-साथ विपक्षी दल भी मामले में उच्च स्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं। अब बड़ा सवाल यही है कि कल्पना मिश्रा और उनके नवजात बच्चे की मौत के मामले में जांच कहां तक पहुंचती है और जिम्मेदारी तय होने के बाद प्रशासन की ओर से क्या कार्रवाई की जाती है।

