शहडोल। मध्य प्रदेश के शहडोल संभाग की 21 वर्षीय शुभांगी मिश्रा की कहानी आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। NEET परीक्षा में 570 अंक हासिल करने के बावजूद जब उन्हें MBBS की सीट नहीं मिली, तो उन्होंने निराश होने के बजाय अपनी मंजिल बदल दी। बिना महंगी कोचिंग और बड़े शहरों की सुविधाओं के केवल सेल्फ स्टडी, यूट्यूब और ऑनलाइन पढ़ाई के दम पर शुभांगी ने एक साथ पांच सरकारी नौकरियों की परीक्षा पास कर सबको चौंका दिया।
उमरिया जिले के शाहपुर गांव की रहने वाली शुभांगी, शहडोल पुलिस जोन कार्यालय में पदस्थ हेड कांस्टेबल श्याम कुमार मिश्रा और गृहिणी सुनीता मिश्रा की बेटी हैं। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा हिंदी माध्यम से पूरी की और शुरुआत से ही डॉक्टर बनने का सपना देखा। पहले प्रयास में NEET में 400 अंक मिले, जबकि दूसरे प्रयास में उन्होंने 570 अंक हासिल किए, लेकिन इसके बावजूद उन्हें MBBS में दाखिला नहीं मिल सका।
इस असफलता के बाद शुभांगी ने हार मानने के बजाय प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दी। उन्होंने रोजाना 8 से 10 घंटे पढ़ाई की और पूरी मेहनत के साथ अपने लक्ष्य पर फोकस रखा। उनकी मेहनत का नतीजा यह रहा कि उन्होंने एक साथ मध्य प्रदेश पुलिस कांस्टेबल, एसएससी स्टेनोग्राफर, मध्य प्रदेश पुलिस सब-इंस्पेक्टर, सहायक उपनिरीक्षक स्टेनो और सूबेदार जैसी पांच सरकारी नौकरियों की परीक्षाएं पास कर लीं। फिलहाल शुभांगी शहडोल पुलिस लाइन में आरक्षक के पद पर अपनी सेवाएं दे रही हैं।
शुभांगी का सपना अभी भी बड़ा है। वह भविष्य में सिविल सेवा में चयनित होकर देश की सेवा करना चाहती हैं और इसके लिए लगातार तैयारी कर रही हैं। उनका मानना है कि सफलता का सबसे बड़ा मंत्र मेहनत, अनुशासन और खुद पर अटूट भरोसा है।
शुभांगी के पिता बताते हैं कि उनकी बेटी ने सोशल मीडिया से हमेशा दूरी बनाए रखी और मोबाइल फोन का इस्तेमाल केवल पढ़ाई के लिए किया। आज शुभांगी की सफलता सिर्फ उनके परिवार की नहीं, बल्कि पूरे शहडोल संभाग और ग्रामीण क्षेत्रों की बेटियों के लिए एक प्रेरणादायक मिसाल बन चुकी है।

