इंदौर। उज्जैन जिले के बड़नगर में मोहर्रम जुलूस के दौरान कथित ‘मॉक ब्लास्ट’ का मामला अब मध्यप्रदेश हाईकोर्ट पहुंच गया है। इस घटना को लेकर इंदौर खंडपीठ में जनहित याचिका दायर की गई है, जिसमें राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी NIA या फिर CBI से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की गई है। साथ ही प्रदेशभर में धार्मिक जुलूसों के लिए एक समान स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर यानी SOP लागू करने की भी मांग उठाई गई है।
यह जनहित याचिका सामाजिक कार्यकर्ता और हिन्दू जागरण मंच के जिला संयोजक सुमित हरड़िया की ओर से दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि 23 जून 2026 को बड़नगर में निकले मोहर्रम जुलूस के दौरान कथित रूप से मॉक ब्लास्ट का प्रदर्शन किया गया था। याचिकाकर्ता का तर्क है कि यदि यह मामला विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत अपराध की श्रेणी में आता है, तो इसकी जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी अधिनियम के तहत NIA से कराई जानी चाहिए। यदि ऐसा संभव नहीं हो, तो निष्पक्ष जांच के लिए CBI को जिम्मेदारी सौंपी जाए।
याचिका में यह सवाल भी उठाया गया है कि धार्मिक जुलूस के दौरान विस्फोट जैसे प्रदर्शन की अनुमति किस आधार पर दी गई और इसके लिए जिम्मेदार कौन है। साथ ही हाईकोर्ट से मांग की गई है कि भविष्य में सभी धार्मिक जुलूसों के लिए एक समान सुरक्षा गाइडलाइन और SOP तैयार की जाए, ताकि विस्फोटक सामग्री, हथियारों के प्रदर्शन और अन्य संवेदनशील गतिविधियों को लेकर स्पष्ट नियम लागू हो सकें।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की खंडपीठ के सामने हुई। राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राहुल सेठी ने जवाब दाखिल करने और आवश्यक निर्देश प्राप्त करने के लिए समय मांगा।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को जवाब प्रस्तुत करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह होगी।
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि राज्य सरकार हाईकोर्ट में क्या जवाब देती है, क्या जांच किसी केंद्रीय एजेंसी को सौंपी जाएगी और क्या धार्मिक आयोजनों की सुरक्षा को लेकर पूरे प्रदेश में नई गाइडलाइन लागू की जाएगी।

