ग्वालियर में PhD छात्रा की मौत से मचा बवाल! रेप और ब्लैकमेलिंग से परेशान होकर दी जान, FIR से 5 घंटे पहले हो चुकी थी मौत, पुलिस पर उठे गंभीर सवाल

ग्वालियर। मध्यप्रदेश के ग्वालियर में पीएचडी छात्रा की आत्महत्या के मामले ने बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद खड़ा कर दिया है। रेप और ब्लैकमेलिंग से परेशान छात्रा ने सुसाइड नोट छोड़कर अपनी जान दे दी, जिसके बाद पूरे मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

मामले में पुलिस ने आरोपी योगेश रावत को अशोकनगर से गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर समय रहते कार्रवाई होती तो क्या छात्रा की जान बच सकती थी? आरोप है कि पीड़िता कई दिनों से FIR दर्ज कराने के लिए थाने और एसपी ऑफिस के चक्कर काट रही थी, लेकिन उसकी शिकायत पर समय पर सुनवाई नहीं हुई।

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा खुलासा FIR के समय को लेकर हुआ है। पुलिस रिकॉर्ड में छात्रा को खुद थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराने वाला बताया गया, जबकि हकीकत यह है कि FIR दर्ज होने से करीब पांच घंटे पहले ही छात्रा दतिया स्थित अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर चुकी थी। इस खुलासे के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।

मामला सामने आने के बाद पड़ाव थाना प्रभारी को फोर्स लीव पर भेज दिया गया है। वहीं एसपी ने पूरे मामले की जांच के आदेश देते हुए जांच की जिम्मेदारी ASP को सौंप दी है।

अब यह मामला सिर्फ आत्महत्या का नहीं, बल्कि पुलिस की संवेदनशीलता और कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल बनकर खड़ा हो गया है। लोग पूछ रहे हैं कि अगर पीड़िता की शिकायत पर समय रहते कार्रवाई होती, तो शायद एक बेटी की जान बचाई जा सकती थी।

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