लखनऊ.सुभासपा अध्यक्ष और योगी सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने एक बार फिर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पर जोरदार हमला बोला है। इस बार उन्होंने सीधे यादव समाज पर आरोप लगाते हुए कई घटनाओं का जिक्र किया और कहा कि राजभर समाज लगातार अत्याचार का शिकार हो रहा है।
ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि बाराबंकी में एक राजभर की हत्या यादवों ने की, मऊ में राजभर बेटी की हत्या यादवों ने की, देवरिया और वाराणसी में भी राजभर समाज के लोगों की हत्या हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि यादव समाज राजभरों पर अत्याचार कर रहा है और इस पर अखिलेश यादव को जवाब देना चाहिए।
राजभर ने तंज कसते हुए कहा कि अखिलेश यादव पहले यह बताएं कि वे दिल्ली की सरकार कैसे गिराएंगे, क्योंकि उनके अंदर अब “करंट” नहीं बचा है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी सिर्फ कुछ खास परिवारों और जातियों तक सीमित होकर रह गई है।
इससे पहले भी ओपी राजभर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर अखिलेश यादव और सपा की राजनीति पर सवाल उठाए थे। उन्होंने लिखा था कि सुभासपा एसी और पीसी करने के लिए नहीं बनाई गई है, बल्कि पिछड़े, अति पिछड़े और बहुजन समाज के अधिकारों की लड़ाई लड़ने के लिए बनाई गई है।
राजभर ने PDA फॉर्मूले पर भी निशाना साधते हुए कहा कि सपा के PDA का असली मतलब “पहला दावा अहिर” है और वह भी सिर्फ सैफई परिवार के लिए। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी में गैर-यादव पिछड़े और बहुजन समाज के लोगों को केवल वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन सत्ता और कुर्सी सिर्फ एक ही परिवार तक सीमित रहती है।
उन्होंने कहा कि अगर समाजवादी पार्टी में सच में बराबरी होती, तो आजमगढ़ से किसी स्थानीय यदुवंशी युवक को सांसद बनाया जाता, न कि सिर्फ परिवारवाद को आगे बढ़ाया जाता। राजभर ने कहा कि बदायूं, कन्नौज और अन्य सीटों पर भी राजभर, निषाद, बिंद, मौर्य, कुशवाहा, पाल, सैनी और अन्य पिछड़ी जातियों के लोगों को मौका मिलना चाहिए था।
ओपी राजभर ने आगे कहा कि अगर समाजवादी पार्टी वास्तव में पिछड़ों की हितैषी होती, तो मुख्यमंत्री पद के लिए अखिलेश यादव की जगह किसी गैर-यादव पिछड़े चेहरे को आगे किया जाता। उन्होंने दावा किया कि पार्टी में सच बोलने वालों को बाहर कर दिया जाता है और केवल “सैफई के नवाबों” को ही सत्ता में जगह मिलती है।
राजभर ने कहा कि अगर पिछड़े और बहुजन समाज को सम्मान और बराबरी मिली होती, तो उन्हें अलग पार्टी बनाकर संघर्ष करने की जरूरत ही नहीं पड़ती।

