CM डॉ. मोहन का बड़ा फैसला! अब अनाज की बर्बादी रोकने IIM मुंबई में ट्रेनिंग लेगा अमला, ULIP सॉफ्टवेयर से होगा वाहनों का सत्यापन

भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने खाद्य विभाग की समीक्षा बैठक में कई बड़े निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में खाद्यान्न वितरण व्यवस्था को और मजबूत और पारदर्शी बनाया जाए ताकि गरीबों तक समय पर राशन पहुंचे और अनाज की बर्बादी रोकी जा सके।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने खाद्य विभाग द्वारा उचित मूल्य दुकानों को जन पोषण मार्ट के रूप में विकसित करने की पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अन्न सेवा जागरूकता कार्यक्रम के तहत पात्र हितग्राहियों को मोबाइल संदेश के जरिए राशन वितरण की सूचना देने की व्यवस्था बेहद उपयोगी साबित हो रही है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री युवा अन्नदूत योजना के तहत रूट ऑप्टिमाइजेशन से सरकार को हर महीने लगभग 42 लाख रुपये की बचत हो रही है। योजना के अंतर्गत खाद्यान्न परिवहन करने वाले वाहनों में GPS आधारित मॉनिटरिंग की व्यवस्था की गई है, जिसकी निगरानी स्टेट लेवल कमांड कंट्रोल सेंटर से की जा रही है।

बैठक में यह भी बताया गया कि सिविल सप्लाई कॉरपोरेशन ने सभी स्तरों पर ऑनलाइन भुगतान व्यवस्था लागू कर दी है, जिससे प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और आसान हुई है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गोदामों में रखे अनाज के नुकसान को कम करने के लिए नई पहल की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स कॉरपोरेशन के कर्मचारियों को Indian Institute of Management Mumbai में विशेष प्रशिक्षण दिलाया जाएगा ताकि खाद्यान्न भंडारण की आधुनिक तकनीकों का बेहतर इस्तेमाल हो सके और अनाज की बर्बादी रोकी जा सके।

इसके साथ ही सरकार अब उपार्जन, मिलिंग और परिवहन में इस्तेमाल होने वाले वाहनों का सत्यापन ULIP सॉफ्टवेयर के जरिए करेगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निगम कर्मचारियों के कौशल विकास और तकनीकी प्रशिक्षण की गतिविधियां लगातार जारी रखी जाएं ताकि खाद्य वितरण प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

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