खंडवा। मध्य प्रदेश के खंडवा में भारतीय जनता पार्टी के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सामने आती दिखाई दे रही है। नगर निगम के विकास कार्यों को लेकर बुलाई गई एक समीक्षा बैठक ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। खास बात यह रही कि भाजपा की महापौर होने के बावजूद भाजपा की ही विधायक कंचन मुकेश तनवे ने नगर निगम के कामकाज की समीक्षा के लिए कलेक्ट्रेट सभागार में बड़ी बैठक बुला ली। नगर निगम के इतिहास में इसे पहली बार हुई ऐसी कार्रवाई बताया जा रहा है, जिसने पार्टी के भीतर सबकुछ ठीक न होने के संकेत दे दिए हैं।
कलेक्ट्रेट में हुई इस हाई प्रोफाइल बैठक में विधायक कंचन तनवे ने नगर निगम अधिकारियों से 21 अहम मुद्दों पर जवाब तलब किया। बैठक में पेयजल संकट, सड़क निर्माण, पीएम आवास योजना, पेंशन योजनाएं, स्वनिधि योजना और शहर के विकास कार्यों की प्रगति को लेकर अधिकारियों से विस्तार से जानकारी ली गई। विधायक ने साफ शब्दों में कहा कि विकास कार्यों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और अब हर महीने ऐसी समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी।
बैठक के दौरान विधायक का एक बयान सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। उन्होंने कहा, “मैं कुछ बोलती नहीं, इसका मतलब ये नहीं कि मुझे कुछ पता नहीं रहता।” विधायक के इस बयान को नगर निगम की कार्यप्रणाली और महापौर के नेतृत्व पर अप्रत्यक्ष सवाल के तौर पर देखा जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह बयान बीजेपी के भीतर चल रही नाराजगी और गुटबाजी की तरफ इशारा करता है।
वहीं विधायक के तेवरों पर महापौर अमृता यादव ने भी सियासी अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि नगर निगम की टीम पूरी प्रतिबद्धता के साथ विकास कार्य कर रही है और जहां तक रिपोर्ट कार्ड की बात है, तो “मेरा रिपोर्ट कार्ड मेरा संगठन तैयार करेगा।” महापौर के इस बयान को विधायक की दखलअंदाजी पर करारा पलटवार माना जा रहा है। हालांकि बैठक में दोनों नेताओं के बीच सीधे तौर पर कोई विवाद नजर नहीं आया, लेकिन बयानबाजी ने पार्टी के भीतर के मतभेदों को सार्वजनिक जरूर कर दिया।
इस बीच नगर निगम की ओर से शहर में चल रहे विकास कार्यों का ब्यौरा भी सामने रखा गया। महापौर ने नए नगर निगम भवन, पुराने निगम कार्यालय की जगह बनने वाले पांच मंजिला शॉपिंग मॉल, रामेश्वर कुंड और पदम कुंड के सौंदर्यीकरण जैसे प्रोजेक्ट्स की जानकारी दी। वहीं निगमायुक्त प्रियंका राजावत ने बताया कि शहर में करीब साढ़े सात करोड़ रुपए की लागत से सड़क और सीसी निर्माण कार्य तेजी से चल रहे हैं।
लेकिन इन सबके बीच सबसे ज्यादा चर्चा बीजेपी के अंदर चल रही सियासी खींचतान की हो रही है। लंबे समय से विधायक और महापौर के बीच दूरी की चर्चाएं चल रही थीं, जो अब सार्वजनिक मंच पर साफ दिखाई देने लगी हैं। खंडवा की यह बैठक अब विकास से ज्यादा बीजेपी के भीतर के ‘शीतयुद्ध’ को लेकर चर्चा का विषय बन गई है।

