Bargi Cruise Accident Case: जांच आयोग में पहुंचा मामला, प्रशासन पर लापरवाही के आरोप, मौसम विभाग को भी पक्षकार बनाने की मांग

 जबलपुर। जबलपुर के बरगी बांध में हुए दर्दनाक क्रूज हादसे को लेकर जांच आयोग के सामने एक महत्वपूर्ण याचिका दायर की गई है। इस याचिका में हादसे के लिए प्रशासनिक लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया गया है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। साथ ही कई गंभीर सवाल उठाते हुए मौसम विभाग को भी मामले में पक्षकार बनाने की मांग की गई है।

याचिका में दावा किया गया है कि जिस क्रूज का संचालन किया जा रहा था, उसका स्टाफ पूरी तरह प्रशिक्षित नहीं था। इसके अलावा हादसे का शिकार हुआ क्रूज भी निर्धारित सुरक्षा मानकों पर खरा नहीं उतरता था। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि दुर्घटना के समय मौके पर एनडीआरएफ और एसडीईआरएफ जैसी आपदा राहत एजेंसियों की कोई प्रभावी तैनाती नहीं थी। बचाव कार्य में भी शासन के नाममात्र कर्मचारी मौजूद थे, जबकि घटनास्थल के पास चल रहे दूसरे प्रोजेक्ट से जुड़े लोगों ने राहत और बचाव का जिम्मा संभाला।

याचिका में मौसम विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। कहा गया है कि यदि समय रहते मौसम की सटीक जानकारी और चेतावनी दी जाती तो शायद इतनी बड़ी त्रासदी टाली जा सकती थी। इसी आधार पर मौसम विभाग को भी जांच प्रक्रिया में पार्टी बनाने की मांग की गई है। इसके अलावा यह भी आरोप लगाया गया है कि क्रूज संचालन स्थल पर हवा की गति मापने के लिए आवश्यक विंड मीटर जैसी बुनियादी व्यवस्था भी मौजूद नहीं थी।

याचिका में प्रदेश के सभी वॉटर स्पोर्ट्स और पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों के लिए अनिवार्य बीमा व्यवस्था लागू करने की मांग भी की गई है, ताकि भविष्य में किसी हादसे की स्थिति में पीड़ित परिवारों को आर्थिक सुरक्षा मिल सके।

गौरतलब है कि 30 अप्रैल को जबलपुर के बरगी डैम में हुआ यह हादसा पूरे देश को झकझोर देने वाला था। शाम के समय पर्यटक डबल डेकर क्रूज में सैर का आनंद ले रहे थे, तभी अचानक तेज आंधी और हवाओं के कारण क्रूज अनियंत्रित होकर पानी में डूबने लगा। देखते ही देखते वहां चीख-पुकार मच गई और कई लोग पानी में समा गए। इस भीषण हादसे में 13 लोगों की जान चली गई थी, जबकि कई अन्य लोगों को बचाव दल ने सुरक्षित बाहर निकाला था।

अब इस मामले में जांच आयोग के सामने उठे नए सवालों ने हादसे की जांच को और भी महत्वपूर्ण बना दिया है। सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच में आखिर किन जिम्मेदारों की जवाबदेही तय होती है और पीड़ित परिवारों को कब न्याय मिलता है।

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