इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर से जमीन फर्जीवाड़े का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि एक जीवित महिला को सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर उसकी 100 करोड़ रुपये से ज्यादा कीमत वाली जमीन का नामांतरण करा दिया गया और बाद में उसे बेच भी दिया गया। शिकायत के बाद पुलिस ने 13 नामजद आरोपियों समेत अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। साथ ही कथित फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र की भी जांच की जाएगी।
एफआईआर के मुताबिक फरियादी द्रोपदीबाई ने बताया कि उनके पति रणछोड़दास के नाम पर दर्ज जमीन उनके निधन के बाद नियमानुसार उनके नाम हो गई थी। लेकिन इसी दौरान ससुराल पक्ष के कुछ लोगों ने भरोसे में लेकर विभिन्न दस्तावेजों पर उनके अंगूठे लगवा लिए। महिला का आरोप है कि उन्हें बताया गया था कि यह केवल राजस्व संबंधी औपचारिकताएं हैं, जबकि बाद में इन्हीं दस्तावेजों का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल किया गया।
महिला ने यह भी आरोप लगाया कि ससुराल पक्ष ने गांव का मकान भी बेच दिया और बिक्री की रकम उन्हें नहीं दी। कुछ समय बाद विवाद और मारपीट के बाद उन्हें घर से निकाल दिया गया, जिसके बाद वे अपनी बेटी के साथ रहने लगीं।
पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब उनकी बेटी ने जमीन के राजस्व रिकॉर्ड निकलवाए। दस्तावेजों में पता चला कि महिला का नाम रिकॉर्ड से हट चुका है और जमीन दूसरे लोगों के नाम दर्ज हो चुकी है। एसडीएम न्यायालय में अपील के दौरान जानकारी सामने आई कि सरकारी रिकॉर्ड में द्रोपदीबाई को मृत दर्शाया गया था और इसी आधार पर नामांतरण की पूरी प्रक्रिया पूरी की गई।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने कथित तौर पर महिला का फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार कराया और उसी के आधार पर करोड़ों रुपये की जमीन का नामांतरण कर उसे बेच दिया। महिला का कहना है कि उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं थी और न ही उन्होंने कभी अपनी संपत्ति बेचने की सहमति दी।
बताया जा रहा है कि विवादित जमीन तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्र में स्थित है, जिसकी मौजूदा बाजार कीमत 100 करोड़ रुपये से अधिक आंकी जा रही है। इसी वजह से इस मामले को बड़े भूमि फर्जीवाड़े के रूप में देखा जा रहा है।
पुलिस ने शिकायत के आधार पर कैलाश चौधरी, शंकर चौधरी, जगदीश चौधरी, प्रकाश चौधरी, विष्णु चौधरी, शांतिलाल चौधरी, राजन चौधरी, सदन चौधरी, पवित्रा चौधरी, पार्वती चौधरी, लखन चौधरी, मनोज चौधरी, रामू नागदावाला समेत अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
फिलहाल पुलिस जमीन के नामांतरण, बिक्री से जुड़े दस्तावेजों और कथित फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र की जांच कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि पूरी प्रक्रिया में किन-किन लोगों की भूमिका रही और क्या इस मामले के तार किसी बड़े भूमि माफिया नेटवर्क से जुड़े हैं। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह इंदौर के सबसे बड़े जमीन घोटालों में से एक साबित हो सकता है।

