ग्वालियर। मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के एक बयान पर शुरू हुआ विवाद अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। कुशवाह समाज को लेकर दिए गए उनके बयान पर विरोध बढ़ने के बाद उन्होंने सार्वजनिक रूप से माफी मांग ली है। एक पत्र जारी करते हुए नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि यदि उनके किसी शब्द से समाज के किसी भी व्यक्ति की भावनाएं आहत हुई हैं तो वे अपने शब्द वापस लेते हैं और इसके लिए खेद व्यक्त करते हैं।
पूरा विवाद मुरैना में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दिए गए बयान से शुरू हुआ था। कार्यक्रम में नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा था कि कुशवाह समाज वर्षों से भारतीय जनता पार्टी के साथ रहा है, लेकिन बीच-बीच में इधर-उधर जाने से उसकी विश्वसनीयता प्रभावित हुई है। उन्होंने यह भी कहा था कि “पूछ-परख उसी की होती है, जो एक खूंटे पर बंधता है।”
यह बयान सामने आते ही कुशवाह समाज के कई संगठनों और लोगों ने कड़ा विरोध जताया। सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक इस टिप्पणी को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं और इसे समाज की भावनाओं को आहत करने वाला बताया गया।
विरोध बढ़ने के बाद विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने अपने आधिकारिक लेटरहेड पर कुशवाह समाज के नाम पत्र जारी किया। उन्होंने लिखा कि हाल ही में भाजपा नेता कमलेश कुशवाह के घर आयोजित एक पारिवारिक कार्यक्रम में बातचीत के दौरान कही गई बातों से यदि किसी समाज बंधु को ठेस पहुंची है तो वे अपने शब्द वापस लेते हैं।
अपने पत्र में नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि कुशवाह समाज और उनका रिश्ता हमेशा सम्मान और विश्वास का रहा है। उन्होंने लिखा कि वे जीवनभर कुशवाह समाज का सम्मान करते आए हैं और भविष्य में भी करते रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि समाज का अपमान करने की बात वे सपने में भी नहीं सोच सकते और यदि उनके किसी शब्द से किसी को पीड़ा हुई है तो उसके लिए वे खेद व्यक्त करते हैं।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद मध्य प्रदेश की राजनीति भी गरमा गई है। विपक्ष इस मुद्दे को लेकर भाजपा पर लगातार निशाना साध रहा है, जबकि भाजपा का कहना है कि विधानसभा अध्यक्ष ने माफी मांगकर अपनी भावना स्पष्ट कर दी है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि नरेंद्र सिंह तोमर की सार्वजनिक माफी के बाद कुशवाह समाज की प्रतिक्रिया क्या होती है और क्या इस विवाद का यहीं अंत हो जाता है।

