धार। मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला मंदिर में गुरुवार को साध्वी ऋतंभरा पहुंचीं। यहां उन्होंने मां वाग्देवी के चित्र के दर्शन कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इस दौरान पूरा भोजशाला परिसर वैदिक मंत्रोच्चार से गूंज उठा। साध्वी ऋतंभरा के आगमन की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी भोजशाला पहुंच गए और उनका स्वागत किया।
श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए साध्वी ऋतंभरा ने भोजशाला के इतिहास और उसके महत्व पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि भोजशाला का सत्य कई अग्नि परीक्षाओं से गुजर चुका है और अब उस सत्य को स्वीकार करते हुए यह स्थान हिंदू समाज को सौंपा गया है। उन्होंने कहा कि यह सामान्य बुद्धि से समझी जाने वाली बात है कि राजा भोज पहले हुए थे या कथित मौलाना, इसका जवाब इतिहास में साफ दिखाई देता है।
साध्वी ऋतंभरा ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि एक दिन भोजशाला में फिर से राजा भोज के समय जैसा वैभव लौटेगा। उन्होंने कहा कि मां वाग्देवी अधीर होकर पुकार रही हैं कि उन्हें लंदन से धार आना ही होगा, क्योंकि वे भारत को भारत बनाए रखना चाहती हैं और समय आने पर भगवती अवश्य आएंगी।
अपने संबोधन के दौरान उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए Gen Z आंदोलन का भी उल्लेख किया और वहां कुछ युवतियों द्वारा कथित तौर पर अपशब्दों के इस्तेमाल पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि जब समाज में संस्कार कमजोर पड़ने लगते हैं, तब प्रह्लाद जैसी आस्था और साहस की आवश्यकता होती है।
साध्वी ऋतंभरा ने कहा कि धार की यह धरती केवल गौरवशाली इतिहास की नहीं, बल्कि संघर्ष और बलिदान की भी साक्षी रही है। यही भूमि विद्वानों, कवियों और कलाकारों की रही है और इसी ने कठिन दौर भी देखा है। उन्होंने कहा कि तमाम कठिनाइयों के बावजूद हिंदू समाज ने अपने विश्वास का दीप कभी बुझने नहीं दिया और यही कारण है कि आज भोजशाला को लेकर उसके पक्ष में निर्णय सामने आया है।
उन्होंने कहा कि असली वैभव केवल भव्य इमारतों से नहीं आता, बल्कि ज्ञान, विज्ञान, साहित्य, संगीत और संस्कृति से आता है। राजा भोज के समय धार ने पूरे भारत को इन क्षेत्रों में नई पहचान दी थी और भविष्य में भी यही भूमि सांस्कृतिक नेतृत्व कर सकती है।
अपने संबोधन के अंत में साध्वी ऋतंभरा ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को संस्कारों की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भारत की संतानों को वासनाओं और अपसंस्कृति नहीं, बल्कि संस्कारों के गंगाजल से सींचा जाना चाहिए। उन्होंने दोहराया कि मां भगवती भारत की संस्कृति और मूल्यों की रक्षा के लिए अधीर हैं और यही कारण है कि वे कह रही हैं, उन्हें लंदन से धार आना ही होगा।

