भोपाल। मध्यप्रदेश के सबसे बड़े एजुकेशन हब इंदौर में अब सियासी हलचल तेज होने वाली है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम 12 सितंबर को आयोजित करने की तैयारी चल रही है। कार्यक्रम को लेकर कांग्रेस ने तैयारियां तेज कर दी हैं और राहुल गांधी की विशेष टीम भी दिल्ली से इंदौर पहुंचकर व्यवस्थाओं और कार्यक्रम की रूपरेखा का जायजा लेगी।
इसी सिलसिले में मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आज दोपहर 3 बजे इंदौर में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों की अहम बैठक बुलाई है। इस बैठक में कार्यक्रम की तैयारियों के साथ-साथ आयोजन की रणनीति और जिम्मेदारियों पर चर्चा होने की संभावना है।
खास बात यह है कि इस कार्यक्रम के लिए पहले जबलपुर के नाम पर विचार किया जा रहा था, लेकिन बाद में इंदौर को प्राथमिकता दी गई। इसकी सबसे बड़ी वजह इंदौर का प्रदेश का प्रमुख शैक्षणिक केंद्र होना है।
इंदौर में देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, आईआईटी और आईआईएम जैसे देश के प्रतिष्ठित संस्थान मौजूद हैं। इसके अलावा शहर में बड़ी संख्या में कॉलेज और शिक्षण संस्थान हैं, जहां मध्यप्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से छात्र-छात्राएं पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए पहुंचते हैं।
ऐसे में कांग्रेस को उम्मीद है कि इंदौर में राहुल गांधी का यह कार्यक्रम युवाओं और छात्रों के बीच व्यापक पहुंच बनाने में मदद करेगा।
दरअसल, कांग्रेस की नजर आगामी छात्र संघ चुनावों के साथ-साथ प्रदेश के बड़े युवा वोट बैंक पर भी है। ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के जरिए राहुल गांधी सीधे विद्यार्थियों और युवाओं से संवाद करने की कोशिश करेंगे।
इस दौरान पेपर लीक, भर्ती प्रक्रिया में देरी, बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी चुनौतियों जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। यानी कांग्रेस इस कार्यक्रम के जरिए छात्रों की समस्याओं को राजनीतिक मुद्दे के तौर पर भी मजबूती से उठाने की तैयारी में है।
कार्यक्रम को लेकर मध्यप्रदेश कांग्रेस नेतृत्व की एआईसीसी के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ शुरुआती चर्चा भी हो चुकी है। अब जीतू पटवारी की बैठक के बाद कार्यक्रम के आयोजन स्थल और इसकी अंतिम रूपरेखा पर मुहर लगने की उम्मीद है।
अगर 12 सितंबर को इंदौर में राहुल गांधी का ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम तय होता है, तो यह कांग्रेस के लिए सिर्फ एक छात्र संवाद नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश के युवाओं के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की बड़ी कोशिश भी माना जा सकता है।

