भोपाल। दुबई में AIM Congress-2026 के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश में निवेश को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में उद्योग और व्यापार को आसान बनाने के लिए 2700 से ज्यादा नियमों और करीब 900 कानूनों को समाप्त किया गया है। सरकार का प्रयास है कि उद्योगपतियों और निवेशकों को कम से कम प्रक्रियाओं में आसानी से काम करने का माहौल मिले। मुख्यमंत्री ने कहा कि तय नीतियों के तहत और जरूरत पड़ने पर निवेशकों को आवश्यक छूट भी दी जाएगी।
दुबई में आयोजित “इन्वेस्ट इन मध्यप्रदेश” इंटरैक्टिव सेशन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आज दुनियाभर में रहने वाला भारतीय समुदाय खुद को गौरवान्वित महसूस करता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि गुजरात के मुख्यमंत्री रहते नरेंद्र मोदी ने विकास के नए आयाम स्थापित किए और अब प्रधानमंत्री के रूप में दुनिया भारत की आर्थिक ताकत को देख रही है। उन्होंने दुबई को वैश्विक अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण केंद्र बताते हुए यूएई के जरिए अफ्रीका, एशिया और यूरोप से होने वाले व्यापार का भी उल्लेख किया।
मुख्यमंत्री ने मध्यप्रदेश में खनन क्षेत्र की संभावनाओं को भी निवेशकों के सामने रखा। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में हीरा और सोने जैसे खनिज संसाधन मौजूद हैं और खनन क्षेत्र में विकास की बड़ी संभावनाएं हैं। मुख्यमंत्री ने निवेशकों से प्रदेश में आकर अपने व्यापार और उद्योग का विस्तार करने की अपील की।
पर्यटन और होटल उद्योग को लेकर भी मुख्यमंत्री ने निवेशकों को कई सुविधाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि होटल व्यवसाय शुरू करने पर मध्यप्रदेश सरकार 30 प्रतिशत तक कैपिटल सब्सिडी उपलब्ध करा रही है। साथ ही हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए भी सरकार काम कर रही है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश को आशाओं और असीम संभावनाओं की धरती बताते हुए निवेशकों को जनवरी 2027 में भोपाल में होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट यानी GIS-2027 में शामिल होने का न्योता दिया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में देश की सबसे अच्छी एविएशन पॉलिसी में से एक है और यूएई तथा अबूधाबी के लिए सीधी एयर कनेक्टिविटी भी उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि सरकार प्रति फ्लाइट VGF यानी वायबिलिटी गैप फंडिंग भी दे रही है और अगले महीने शारजाह के लिए भी उड़ान सेवा शुरू होने की बात कही।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में उनकी सरकार के दौरान करीब 15 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव अब जमीन पर दिखाई देने लगे हैं। प्रदेश से 76 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का निर्यात हो रहा है। उन्होंने मध्यप्रदेश की विकास दर, रोजगार और निवेश के क्षेत्र में उपलब्धियों का भी जिक्र किया।
मुख्यमंत्री ने निवेशकों को बताया कि अब मध्यप्रदेश में औद्योगिक इकाई स्थापित करने के लिए महज 29 दिनों में जमीन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है। सरकार ऑन-द-स्पॉट लैंड अलॉटमेंट पर जोर दे रही है। प्रदेश में एक लाख से ज्यादा का इंडस्ट्रियल लैंड बैंक और पांच लाख किलोमीटर से अधिक का सड़क नेटवर्क होने का भी दावा किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि निवेशकों के लिए जरूरी सभी व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।
वहीं, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग के अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई ने भी निवेशकों को मध्यप्रदेश में उपलब्ध अवसरों की जानकारी दी। उन्होंने प्रदेश की कनेक्टिविटी, निवेश अनुकूल नीतियों और विकसित हो रहे औद्योगिक इकोसिस्टम के साथ लॉजिस्टिक्स, खनन और पर्यटन क्षेत्र की संभावनाओं पर प्रेजेंटेशन दिया।
उन्होंने बताया कि लॉजिस्टिक्स पॉलिसी-2025 के तहत निवेशकों को फिक्स्ड कैपिटल इन्वेस्टमेंट पर 30 प्रतिशत तक सहायता सहित कई प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं। मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क, नर्मदा एक्सप्रेस-वे और दिल्ली-नागपुर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से जुड़े औद्योगिक अवसरों को भी निवेशकों के सामने रखा गया।
खनन क्षेत्र में हीरा, तांबा, मैंगनीज, चूना पत्थर और सोने जैसे खनिज संसाधनों को निवेश के महत्वपूर्ण अवसर के रूप में बताया गया। वहीं पर्यटन के क्षेत्र में मध्यप्रदेश की ऐतिहासिक विरासत, वन्यजीव और प्राकृतिक स्थलों को निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बताया गया।
प्रेजेंटेशन में बताया गया कि वर्ष 2024 में मध्यप्रदेश में 13 करोड़ 41 लाख पर्यटक पहुंचे थे। पर्यटन नीति-2025 के तहत पूंजी निवेश पर 30 प्रतिशत तक सब्सिडी, स्टांप ड्यूटी की प्रतिपूर्ति और 90 वर्ष तक की लीज जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की जानकारी भी दी गई।
दुबई में भारत के काउंसिल जनरल डॉ. ई. विष्णुवर्धन रेड्डी ने भारत और यूएई के बीच मजबूत होती रणनीतिक साझेदारी का जिक्र किया। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के उद्योग जगत के साथ लगातार सीधे संवाद और सक्रिय भागीदारी की सराहना की। उनका कहना था कि आने वाले वर्षों में यूएई और मध्यप्रदेश के बीच जुड़ाव और मजबूत किया जाएगा।
आईपीएफ यूएई के नेशनल प्रेसिडेंट जितेंद्र वैद्य ने भी मध्यप्रदेश की धार्मिक और पर्यटन विरासत का उल्लेख करते हुए प्रदेश में निवेश को लेकर सकारात्मक बात कही। वहीं उद्योगपति और सांसद राजिंदर गुप्ता ने कहा कि मध्यप्रदेश आने वाले समय में देश की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और प्रदेश में उद्योगों को सरकार की ओर से सहयोग मिल रहा है।
अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की दुबई यात्रा का बड़ा फोकस साफ है—मध्यप्रदेश को निवेश का नया केंद्र बनाना और दुनिया भर के निवेशकों को GIS-2027 के लिए भोपाल लाना। सवाल यही है कि दुबई में दिए गए निवेश के ये वादे और प्रस्ताव कितनी तेजी से मध्यप्रदेश की जमीन पर वास्तविक परियोजनाओं और रोजगार के अवसरों में बदलते हैं।

