भोपाल। देश में युवाओं के आंदोलनों से लेकर सोशल मीडिया तक बढ़ती गाली-गलौज और अमर्यादित भाषा अब सियासी बहस का मुद्दा बन गई है। दिल्ली के जंतर-मंतर से लेकर झारखंड में हुए आंदोलनों तक, कई ऐसे वीडियो सामने आए जिनमें युवा विरोध प्रदर्शन के दौरान भाषा की मर्यादा लांघते नजर आए। अब इसी मुद्दे को लेकर आरएसएस के अनुषांगिक संगठन बजरंग दल ने युवाओं के बीच संस्कार और सभ्यता का संदेश पहुंचाने के लिए एक नया अभियान शुरू करने का ऐलान किया है।
बजरंग दल का कहना है कि इस अभियान का खास फोकस जेन जी और जेन अल्फा के युवाओं पर रहेगा। संगठन के मुताबिक विरोध करना लोकतंत्र का अधिकार है, लेकिन विरोध के नाम पर गाली-गलौज और असभ्य भाषा का इस्तेमाल चिंता का विषय है। बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के प्रांत प्रचार-प्रसार प्रमुख जितेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि विचारधारा किसी के भी पक्ष या विरोध में हो सकती है, लेकिन विरोध का तरीका सामाजिक मर्यादाओं के अनुरूप होना चाहिए।
संगठन का दावा है कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो युवाओं में बढ़ती दिशाहीनता की ओर इशारा कर रहे हैं। नशे और गलत संगत से दूर कर युवाओं को राष्ट्र जागरण से जोड़ने के लिए अभियान चलाया जाएगा। बजरंग दल का कहना है कि सार्वजनिक मंचों और सोशल मीडिया पर अपशब्दों का बढ़ता इस्तेमाल भारतीय संस्कृति और सामाजिक मूल्यों के लिए चिंता का विषय है।
जंतर-मंतर के एक आंदोलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ छात्रों की अभद्र भाषा के वीडियो भी वायरल हुए थे। इस पर प्रधानमंत्री ने कहा था कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार सभी को है, लेकिन भाषा की मर्यादा बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने छात्रों की नाराजगी को युवा जोश से जोड़ते हुए कहा था कि गुस्से में कई बार ऐसी बातें हो जाती हैं और युवाओं को दंड देने के बजाय सही दिशा दिखाने की जरूरत है।
लेकिन बजरंग दल के इस अभियान ने सियासी पारा भी चढ़ा दिया है। कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता डॉक्टर विक्रम चौधरी ने आरोप लगाया कि देश में युवाओं के बीच बढ़ते असंतोष के लिए भाजपा सरकार जिम्मेदार है। उनका कहना है कि युवाओं को रिझाने और डैमेज कंट्रोल के लिए इस तरह के अभियान पहले भी किए जाते रहे हैं।
वहीं भाजपा प्रदेश प्रवक्ता अजय सिंह यादव ने कहा कि जेन जी हो या जेन अल्फा, यही युवा देश का भविष्य हैं। नई पीढ़ी को सही और गलत का फर्क समझाना परिवार और समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि विरोध और मुद्दे अपनी जगह हैं, लेकिन गाली-गलौज और भाषा की गिरती मर्यादा निश्चित तौर पर चिंता का विषय है।
अब सवाल यही है कि बजरंग दल का यह अभियान युवाओं की भाषा और सोच में कितना बदलाव ला पाएगा और क्या संस्कार के नाम पर शुरू हुआ यह अभियान सियासी बयानबाजी से आगे निकलकर जमीन पर असर दिखा पाएगा?

