भोपाल। मध्य प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों से जुड़े प्रोबेशन पीरियड यानी परीक्षा अवधि में कम वेतन के नियम को लेकर अब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। जबलपुर हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ मध्य प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है और हाईकोर्ट के आदेश पर रोक यानी स्टे की मांग करते हुए अपना जवाब दाखिल कर दिया है।
दरअसल, मध्य प्रदेश में नए नियुक्त सरकारी कर्मचारियों के प्रोबेशन पीरियड के दौरान पहले साल 70 प्रतिशत, दूसरे साल 80 प्रतिशत और तीसरे साल 90 प्रतिशत वेतन देने का प्रावधान था। इसी नियम को जबलपुर हाईकोर्ट ने रद्द करते हुए नए कर्मचारियों को प्रोबेशन पीरियड से ही 100 प्रतिशत यानी पूरा वेतन देने के निर्देश दिए थे।
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद राज्य सरकार ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सरकार का कहना है कि प्रोबेशन पीरियड के दौरान कर्मचारियों को पूरा वेतन देने से राज्य के राजकोष पर भारी वित्तीय भार पड़ सकता है। इसी आधार पर सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने की मांग की है।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सरकार से यह सवाल भी सामने आया कि हाईकोर्ट के फैसले पर रोक क्यों लगाई जाए। अब राज्य सरकार ने इस सवाल के जवाब में अपना पक्ष और विस्तृत जवाब शीर्ष अदालत में दाखिल कर दिया है।
अब सुप्रीम कोर्ट में होने वाली आगामी सुनवाई पर सबकी नजर है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सुप्रीम कोर्ट हाईकोर्ट के 100 प्रतिशत वेतन देने के आदेश पर रोक लगाएगा, या फिर नए सरकारी कर्मचारियों को प्रोबेशन पीरियड से ही पूरा वेतन देने का फैसला बरकरार रहेगा। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के अगले आदेश का सीधा असर मध्य प्रदेश के हजारों सरकारी कर्मचारियों पर पड़ सकता है।

