भोपाल। दिल्ली के प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भगवान श्रीराम के रूप में पेश किए जाने और ‘मोदी चालीसा’ का पाठ किए जाने के मामले ने अब सियासी और धार्मिक बहस को तेज कर दिया है। इस पूरे मामले को लेकर भोपाल में साधु-संत सन्यासी परिषद की बैठक हुई, जिसमें संतों ने घटना पर कड़ा विरोध जताया और इसे सनातन धर्म का अपमान बताया।
राजनीतिक फायदे के लिए भगवान का इस्तेमाल नहीं
परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष अनिलानंद महाराज ने कहा कि इस तरह की घटनाएं सनातन धर्म को बदनाम करने की साजिश हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए भगवान का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अनिलानंद महाराज ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या कोई भी राजनेता महापुरुष या युगपुरुष हो सकता है, लेकिन भगवान नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि निजी स्वार्थ के लिए धर्म और आस्था के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
साधु-संतों ने कार्रवाई का लिया फैसला
साधु-संत सन्यासी परिषद ने बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि इस तरह के कृत्य में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी। संतों का कहना है कि धर्म और आस्था का इस्तेमाल निजी या राजनीतिक स्वार्थ के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
‘राम अवतार’ की तस्वीर की आरती का वीडियो वायरल
दरअसल, दिल्ली के प्रेस क्लब ऑफ इंडिया परिसर में गुरुवार को आयोजित एक कार्यक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। वीडियो में कुछ लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘राम अवतार’ के रूप में बनाई गई तस्वीर की आरती करते और ‘मोदी चालीसा’ का पाठ करते नजर आए।
कार्यक्रम के दौरान ‘जय-जय मोदी’ और ‘हर-हर मोदी’ जैसे नारे भी लगाए गए। वीडियो सामने आने के बाद मामला चर्चा में आ गया और अब भोपाल के साधु-संतों ने इस पूरे घटनाक्रम पर आपत्ति जताते हुए इसे धार्मिक आस्था से जुड़ा गंभीर विषय बताया है।

