इंदौर। देश के बैंकों को हजारों करोड़ रुपये का चूना लगाने वाले कथित घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने बड़ी कार्रवाई की है। ईडी इंदौर ने धन शोधन निवारण अधिनियम यानी पीएमएलए 2002 के तहत महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के मुरुड में अलीबाग के पास अरब सागर के सामने स्थित एक आलीशान प्रॉपर्टी को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है। इस लग्जरी संपत्ति की मौजूदा बाजार कीमत 60 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है।
जांच एजेंसी के मुताबिक, यह मामला करीब 1400 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले से जुड़ा हुआ है। जांच में सामने आया है कि एम/एस एस. कुमार्स नेशनवाइड लिमिटेड यानी एसकेएनएल के पूर्व चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर नितिन शंभुकुमार कासलीवाल पर बैंकों से लिए गए भारी-भरकम कर्ज के दुरुपयोग के आरोप हैं। ईडी का दावा है कि कर्ज की रकम को विभिन्न शेल कंपनियों और पारिवारिक नेटवर्क के माध्यम से इधर-उधर स्थानांतरित किया गया।
जांच में यह भी पता चला कि कथित तौर पर लेयरिंग की जटिल प्रक्रिया के जरिए इस धन को वैध दिखाने की कोशिश की गई और बाद में इसी रकम का इस्तेमाल अरब सागर के किनारे स्थित इस आलीशान प्रॉपर्टी को खरीदने में किया गया। ईडी अब इस पूरे वित्तीय नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है।
इस मामले में यह पहली बड़ी कार्रवाई नहीं है। इससे पहले 23 दिसंबर 2025 को ईडी ने पीएमएलए की धारा 17 के तहत छापेमारी की थी। उस दौरान विदेशी ट्रस्ट और ऑफशोर कंपनियों के जरिए विदेशों में निवेश और संपत्तियां रखने से जुड़े अहम दस्तावेज और सबूत हाथ लगे थे।
इसी जांच के आधार पर लंदन में बकिंघम पैलेस के नजदीक स्थित एक हाई-वैल्यू प्रॉपर्टी को भी अस्थायी रूप से कुर्क किया जा चुका है। इस विदेशी संपत्ति की अनुमानित कीमत करीब 119 करोड़ 55 लाख रुपये बताई गई है। जांच एजेंसी का मानना है कि इस संपत्ति का संबंध भी कथित घोटाले से जुड़े धन के इस्तेमाल से हो सकता है।
ईडी की जांच अभी जारी है और एजेंसी देश के साथ-साथ विदेशों में भी ऐसी अन्य संपत्तियों की तलाश कर रही है, जो इस कथित बैंक धोखाधड़ी से जुड़े धन से खरीदी गई हों। सूत्रों के अनुसार, 1400 करोड़ रुपये के इस मामले में आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।
फिलहाल ईडी यह पता लगाने में जुटी है कि बैंक कंसोर्टियम से प्राप्त धन को किन-किन माध्यमों से स्थानांतरित किया गया और इसका लाभ आखिर किन लोगों तक पहुंचा। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह मामला सिर्फ एक प्रॉपर्टी या एक देश तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार कई देशों और कंपनियों से जुड़े हो सकते हैं। ऐसे में आने वाले समय में इस हाई-प्रोफाइल बैंक घोटाले में और भी बड़ी कार्रवाई देखने को मिल सकती है।

