समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आज़म खान के ड्रीम प्रोजेक्ट मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी पर अब तक का सबसे बड़ा संकट मंडराता नजर आ रहा है। रामपुर विकास प्राधिकरण ने यूनिवर्सिटी परिसर के 40 में से 38 भवनों को अवैध निर्माण बताते हुए उनके ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया है। इस फैसले के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है।
जहां समाजवादी पार्टी इस कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध बता रही है, वहीं प्रशासन का कहना है कि यह फैसला पूरी कानूनी प्रक्रिया और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर लिया गया है। रामपुर विकास प्राधिकरण के अनुसार, जांच में पाया गया कि परिसर में मौजूद अधिकांश इमारतों का निर्माण बिना स्वीकृत नक्शे और आवश्यक अनुमति के किया गया था।
प्राधिकरण का दावा है कि कुल 40 भवनों में से केवल दो भवनों के पास ही सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति थी, जबकि शेष 38 भवनों के लिए वैध अनुमति संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जा सके। यही वजह है कि उत्तर प्रदेश नगर योजना एवं विकास अधिनियम के तहत कार्रवाई करते हुए ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया गया।
प्रशासन का यह भी कहना है कि कार्रवाई से पहले यूनिवर्सिटी प्रबंधन को नोटिस जारी किया गया था। विश्वविद्यालय की ओर से लिखित जवाब भी दाखिल किया गया और व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर भी दिया गया। सभी पक्षों को सुनने और रिकॉर्ड की जांच के बाद ही अंतिम निर्णय लिया गया।
गौरतलब है कि वर्ष 2006 में स्थापित जौहर यूनिवर्सिटी अपने निर्माण काल से ही विवादों में रही है। समय-समय पर विश्वविद्यालय पर जमीन अधिग्रहण, भूमि उपयोग और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं को लेकर कई आरोप लगते रहे हैं। इनमें किसानों की जमीन, सरकारी भूमि और अन्य संपत्तियों से जुड़े मामले भी शामिल रहे हैं। हालांकि, इन मामलों में कई प्रकरण न्यायालयों और संबंधित एजेंसियों के समक्ष विचाराधीन रहे हैं।
वर्ष 2019 में भी विश्वविद्यालय परिसर में हुई कार्रवाई के दौरान कुछ ऐतिहासिक दस्तावेजों और पुस्तकों की बरामदगी को लेकर मामला सुर्खियों में आया था। इसके बाद आज़म खान और उनके सहयोगियों के खिलाफ कई मुकदमे दर्ज किए गए थे।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवन वास्तव में गिराए जाएंगे, या फिर यह मामला अदालत की चौखट तक पहुंचेगा? आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर कानूनी और राजनीतिक लड़ाई और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।
फिलहाल, जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर जारी यह विवाद एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है और सभी की निगाहें प्रशासन और अदालत के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।

