भोपाल। मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। इस बीच ड्राफ्ट कमेटी की बैठकों में आदिवासी समुदाय से जुड़े कई महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए हैं। चर्चा का सबसे बड़ा विषय यह है कि आदिवासी समाज में विवाह पंजीयन को अनिवार्य बनाया जाए या नहीं। कमेटी के सदस्य शत्रुघ्न सिंह ने बताया कि इस मुद्दे पर अलग-अलग पक्षों से कई सुझाव प्राप्त हुए हैं, जिन पर विचार किया जा रहा है।
कमेटी के सामने पहला सुझाव यह आया है कि अनुसूचित जनजाति वर्ग को यूसीसी के दायरे से बाहर रखा जाए, ताकि उनकी पारंपरिक व्यवस्था और मौजूदा अधिकारों पर कोई प्रभाव न पड़े। दूसरा सुझाव यह है कि आदिवासी समुदाय को भी अन्य नागरिकों की तरह यूसीसी के दायरे में शामिल किया जाए।
तीसरा और सबसे चर्चित सुझाव यह है कि आदिवासी समाज के लिए केवल विवाह पंजीयन को अनिवार्य किया जाए, जबकि अन्य मामलों में उनकी वर्तमान व्यवस्था जारी रहे। वहीं चौथा सुझाव यह है कि यूसीसी को स्वैच्छिक रखा जाए, यानी जो परिवार इसे अपनाना चाहें वे अपनी इच्छा से इसमें शामिल हो सकें।
ड्राफ्ट कमेटी अब इन सभी सुझावों और विभिन्न वर्गों से मिले फीडबैक का अध्ययन कर रही है। इसके बाद ही यूसीसी के अंतिम मसौदे का स्वरूप तय किया जाएगा और आगे की प्रक्रिया शुरू होगी।
इसी बीच यूसीसी को लेकर अलग-अलग सामाजिक और धार्मिक संगठनों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। कुछ संगठनों ने इस विषय पर अपनी आपत्तियां और सुझाव सरकार के सामने रखे हैं। उनका कहना है कि किसी भी नए कानून को लागू करने से पहले सभी पक्षों की राय और चिंताओं पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
अब सभी की नजर ड्राफ्ट कमेटी के अंतिम फैसले पर टिकी हुई है, क्योंकि उसी के आधार पर मध्य प्रदेश में यूसीसी के अगले चरण की दिशा तय होगी।

