सिंगरौली। मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में तीसरी संतान के मामले में सेवा से पृथक किए गए उप पंजीयक अशोक सिंह परिहार को फिलहाल बड़ी राहत मिल गई है। राज्य शासन ने उनकी बर्खास्तगी के आदेश पर अंतरिम रोक लगाते हुए स्पष्ट किया है कि अपील प्रकरण में अंतिम फैसला होने तक सेवा समाप्ति संबंधी आदेश प्रभावी नहीं रहेगा।
गौरतलब है कि पंजीयन विभाग ने विभागीय जांच के बाद अशोक सिंह परिहार को सेवा से हटाने का आदेश जारी किया था। जांच में यह तथ्य सामने आया था कि शासकीय सेवा के दौरान उनकी तीसरी संतान का जन्म 19 नवंबर 2003 को हुआ था, जिसे उस समय लागू दो-संतान नीति का उल्लंघन माना गया।
विभागीय जांच समिति की रिपोर्ट और पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया के बाद 11 जून 2026 को उनकी सेवाएं समाप्त करने का आदेश जारी कर दिया गया था। हालांकि, यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई जब राज्य सरकार पहले ही दो-संतान नियम को समाप्त करने की घोषणा कर चुकी थी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा 9 जून को इस प्रावधान को खत्म करने के निर्देश दिए जाने के बाद, 23 साल पुराने मामले में हुई इस कार्रवाई को लेकर कई तरह के सवाल खड़े होने लगे थे। इसी बीच उप पंजीयक अशोक सिंह परिहार ने शासन के समक्ष अपील दायर करते हुए सेवा समाप्ति आदेश पर पुनर्विचार की मांग की।
अपील में उन्होंने अपने पक्ष को विस्तार से रखते हुए कहा कि मामले की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए न्यायोचित निर्णय लिया जाना चाहिए। सुनवाई के दौरान उन्होंने उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा के समक्ष भी अपनी बात रखी और राहत की मांग की।
मामले पर विचार करने के बाद शासन ने कहा कि अपील के अंतिम निस्तारण में समय लग सकता है और यदि इस दौरान सेवा समाप्ति का आदेश प्रभावी रहता है, तो संबंधित अधिकारी को अपूरणीय क्षति उठानी पड़ सकती है। इसी आधार पर 11 जून को जारी बर्खास्तगी के आदेश को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है।
अब इस पूरे मामले में अंतिम फैसला शासन के समक्ष लंबित अपील के निस्तारण के बाद ही लिया जाएगा। फिलहाल उप पंजीयक अशोक सिंह परिहार को अंतरिम राहत मिल गई है और उनकी बर्खास्तगी पर रोक लग गई है।
यह मामला अब दो-संतान नीति से जुड़े पुराने प्रकरणों और उसके कानूनी प्रभावों को लेकर एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में इस अपील पर होने वाला अंतिम फैसला ऐसे कई लंबित मामलों की दिशा तय कर सकता है, जिन पर अभी भी कानूनी और प्रशासनिक बहस जारी है।

