व्यापमं घोटाले में बड़ा खुलासा! 847 आरोपियों का अकेला गवाह बना पेंटर, STF की जांच पर उठे गंभीर सवाल

भोपाल। देश के सबसे चर्चित शिक्षा और भर्ती घोटालों में शामिल व्यापमं घोटाला एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार वजह बना है एक ऐसा खुलासा, जिसने स्पेशल टास्क फोर्स यानी एसटीएफ की जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के मुताबिक व्यापमं घोटाले से जुड़े कई अलग-अलग मामलों में जांच एजेंसी ने सिर्फ एक ही व्यक्ति को सरकारी गवाह बना दिया। हैरानी की बात यह है कि यह शख्स कोई अधिकारी या जांच से जुड़ा विशेषज्ञ नहीं, बल्कि पेशे से पुताई का काम करने वाला एक पेंटर है।

इस गवाह का नाम है सुनील कुशवाह। बताया जा रहा है कि वह व्यापमं घोटाले से जुड़ी हर गतिविधि और घटनाक्रम पर लगातार नजर रखता रहा है। लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सुनील कुशवाह अकेले 847 आरोपियों के खिलाफ दर्ज मामलों में सरकारी गवाह के रूप में सामने आया है।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अलग-अलग मामलों में स्वतंत्र और निष्पक्ष गवाह होना चाहिए, लेकिन व्यापमं से जुड़े कई प्रकरणों में एसटीएफ ने बार-बार एक ही व्यक्ति को गवाह के तौर पर पेश किया। इससे जांच की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे हैं।

बताया जा रहा है कि कई महत्वपूर्ण मामलों में यही गवाह अदालत में अपने पहले दिए गए बयानों से पलट गया था। ऐसे मामलों में गवाह के शत्रुतापूर्ण यानी होस्टाइल होने का सीधा असर सुनवाई पर पड़ा और कई आरोपी तकनीकी आधारों पर राहत पाने में सफल रहे।

सुनील कुशवाह को वर्ष 2011 से 2013 के दौरान आयोजित कई बड़ी भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं से जुड़े मामलों में गवाह बनाया गया था। इनमें प्री-मेडिकल टेस्ट यानी पीएमटी 2012 और 2013, प्री-पीजी परीक्षा 2012, पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा 2012, पुलिस सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा 2012, परिवहन आरक्षक परीक्षा 2012, संविदा शाला शिक्षक ग्रेड-2 और ग्रेड-3 पात्रता परीक्षा 2011, दुग्ध संघ भर्ती परीक्षा 2012 और खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग की परीक्षा 2012 जैसे चर्चित मामले शामिल बताए जा रहे हैं।

इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व कानून मंत्री पीसी शर्मा ने जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि आरोपियों को बचाने के लिए यह एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा था। उनका आरोप है कि जानबूझकर अलग-अलग मामलों में एक ही व्यक्ति को गवाह बनाया गया, ताकि अदालत में मामले कमजोर पड़ जाएं और दोषियों को फायदा मिल सके।

पीसी शर्मा ने यह भी कहा कि यदि व्यापमं घोटाले के दोषियों पर समय रहते सख्त कार्रवाई की गई होती, तो आज देश में परीक्षा प्रणाली को लेकर बार-बार सवाल खड़े नहीं होते। उन्होंने दावा किया कि ऐसी घटनाओं से युवाओं का भरोसा टूटता है और प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता पर भी असर पड़ता है।

फिलहाल व्यापमं घोटाले से जुड़ा यह नया खुलासा एक बार फिर पुराने जख्मों को ताजा कर रहा है। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या इस मामले में जांच एजेंसियों की भूमिका की दोबारा समीक्षा होगी या फिर यह मुद्दा भी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच सिमट कर रह जाएगा।

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