शहडोल। मध्य प्रदेश में सरकारी निर्माण का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने विकास के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहडोल में करीब साढ़े चार किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है, लेकिन इस सड़क के बीच आने वाली करीब 100 मीटर लंबी पुलिया अब तक नहीं बन पाई है। यानी सड़क तैयार है, लेकिन बीच में नदी आते ही पूरा रास्ता बंद हो जाता है।
मामला आदिवासी बाहुल्य शहडोल जिले के बुढ़ार जनपद पंचायत क्षेत्र की ग्राम पंचायत टेघा से छिनमार मार्ग का है। यहां लोक निर्माण विभाग यानी PWD की ओर से करीब 4.5 किलोमीटर सड़क का निर्माण कराया जा रहा है। सड़क का ज्यादातर हिस्सा तैयार हो चुका है, लेकिन रास्ते में आने वाली नदी पर प्रस्तावित पुलिया का निर्माण अब तक शुरू नहीं हुआ है।
गर्मी के मौसम में ग्रामीण किसी तरह नदी पार करके आवागमन कर लेते हैं, लेकिन जैसे ही बारिश शुरू होती है और नदी का जलस्तर बढ़ता है, यह रास्ता पूरी तरह बाधित हो जाता है। ग्रामीणों को कई-कई घंटे तक पानी कम होने का इंतजार करना पड़ता है।
इस समस्या का सबसे ज्यादा असर स्कूली बच्चों, मरीजों, किसानों और रोजमर्रा के काम से आने-जाने वाले लोगों पर पड़ता है। जरूरी काम होने के बावजूद कई बार लोग नदी के दूसरी तरफ फंस जाते हैं और बारिश के दौरान गांव का संपर्क प्रभावित हो जाता है।
ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण की प्राथमिकता ही उलटी कर दी गई। उनका कहना है कि सबसे पहले नदी पर पुलिया बनाई जानी चाहिए थी, ताकि सड़क का इस्तेमाल शुरू हो सके। लेकिन यहां सड़क तो बना दी गई और उसे वास्तव में उपयोगी बनाने वाला सबसे जरूरी हिस्सा ही अधूरा छोड़ दिया गया।
अब ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि जब सड़क के बीच में पुलिया ही नहीं है, तो साढ़े चार किलोमीटर सड़क आखिर किस काम की। सरकारी पैसा खर्च करके सड़क तो बना दी गई, लेकिन जिस पुलिया के बिना यह सड़क पूरी तरह उपयोगी नहीं हो सकती, उसका निर्माण अब तक क्यों नहीं हुआ।
ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द से जल्द पुलिया का निर्माण शुरू कराने की मांग की है, ताकि बारिश के दिनों में उनका संपर्क न टूटे और सरकारी धन से बनाई गई सड़क वास्तव में लोगों के काम आ सके।
अब देखना होगा कि इस मामले में प्रशासन कब तक कार्रवाई करता है और सड़क के बीच छूट गई इस 100 मीटर की पुलिया का निर्माण आखिर कब शुरू होता है।

