भोपाल। मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी को लेकर तैयारियां अब अंतिम चरण में पहुंचती नजर आ रही हैं। राज्य सरकार सभी पक्षों की राय और सुझाव जुटाने के बाद मसौदे को अंतिम रूप देने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। इसी कड़ी में भोपाल में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जा रही है, जिसमें विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों के साथ व्यापक चर्चा होगी।
यूसीसी को लेकर ऑनलाइन सुझाव देने की प्रक्रिया भी अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। सरकार का उद्देश्य है कि समाज के हर वर्ग की राय को शामिल करते हुए ऐसा प्रारूप तैयार किया जाए जो व्यापक संवाद और विचार-विमर्श के बाद सामने आए। इसी वजह से लगातार अलग-अलग संगठनों, विशेषज्ञों और जनप्रतिनिधियों से सुझाव लिए जा रहे हैं।
भोपाल में होने वाली इस अहम बैठक की अध्यक्षता न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली समिति करेगी। बैठक में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि, धर्मगुरु, विभिन्न आयोगों के सदस्य और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी शामिल होंगे। दिनभर चलने वाली बैठकों में यूसीसी के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की जाएगी और संबंधित पक्षों के सुझाव दर्ज किए जाएंगे।
जानकारी के अनुसार बैठक के अलग-अलग सत्रों में विभिन्न वर्गों से संवाद किया जाएगा। दोपहर के समय राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ विचार-विमर्श प्रस्तावित है, जबकि शाम को धर्मगुरुओं और सामाजिक प्रतिनिधियों के साथ चर्चा की जाएगी। सरकार का मानना है कि सभी पक्षों की राय सुनकर ही एक संतुलित और व्यापक मसौदा तैयार किया जा सकता है।
इस बीच सामान्य प्रशासन विभाग ने भी वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं कि वे समिति के समक्ष अपने सुझाव और विचार प्रस्तुत करें। प्रशासनिक स्तर पर भी यूसीसी के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन किया जा रहा है, ताकि विधेयक को लेकर सभी जरूरी बिंदुओं पर स्पष्टता बनी रहे।
सूत्रों के अनुसार राज्य सरकार आगामी 20 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र में यूसीसी विधेयक पेश करने की तैयारी कर रही है। यदि मसौदे को अंतिम मंजूरी मिल जाती है, तो यह मध्यप्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण कदम माना जाएगा।
फिलहाल सभी की नजर भोपाल में होने वाली इस अहम बैठक पर टिकी हुई है, क्योंकि इसी बैठक में मिले सुझाव और चर्चाएं यूसीसी के अंतिम स्वरूप को तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि सरकार इस बहुप्रतीक्षित विधेयक को किस रूप में विधानसभा में प्रस्तुत करती है।

